युवा परिवार सेवा समिति के द्वारा बोध प्रकल्प के तहत सत्यम लान, देवरिया बाईपास, तारा मंडल रोड जिला गोरखपुर में युवा वर्ग के लिए एक कार्यक्रम का आयोजन किया गया। कार्यक्रम में उपास्थि अवध ओझा जी (फाउंडर यथार्थ आईएएस) जी ने युवा भाइयों को संबोधित करते हुवे कहा साधक के जीवन में ब्रह्मज्ञान की ध्यान साधना अति आवस्यकता है। ध्यान से धैर्य की प्राप्ति होती है।धैर्य से समझ की प्राप्ति होती है । समझ से साहस की प्राप्ति होती है। जब मनुष्य में साहस प्राप्त होता है उसमें अथाह शक्ति सामर्थ्य की प्राप्ति होती है। अर्थात ब्रह्मज्ञान की ध्यान साधना से से ही ये सब साधकों को प्राप्त होता है।आज वैज्ञानिक शोध के द्वारा भी प्रमाणित किया गया है ,ध्यान से शारिरिक, मानसिक, आध्यात्मिक तीनो लाभ प्राप्त होता है। हमारे जीवन मे वास्तविक ध्यान का शुभारंभ एक पूर्ण सतगुरू के द्वारा होता है।पूर्ण गुरु वही होता है ,केवल ईश्वर की चर्चा न करता हो , ईश्वर का प्रत्यक्ष दर्शन भी करवा सकता हो। वेदों शास्त्रों के अनुसार दिव्य नेत्र खोलकर अंतर्जगत में ईश्वरीय परम प्रकाश का दर्शन होने के पश्चात ही सनातन ध्यान प्रारंभ होता है। युवा परिवार सेवा समिति के संस्थापक व संचालक श्री आशुतोष महाराज जी युवायों को केवल कोरी बाते नही बल्कि विज्ञान सम्मत ऋषियों का वह ब्रह्मज्ञान के द्वारा उस परम प्रकाश का दर्शन भी कराते है।ओझा जी ने गोरखपुर विश्वविद्यालय से आये बहुत से विद्यार्थियों के प्रश्नों उत्तर भी दिया। शिक्षा के साथ संस्कार भी आवश्यक है आदि संदेश छात्र छात्राओं को भी प्राप्त हुवा। मंच संचालन करते हुवे स्वामी अर्जुनानंद जी ने कहा पूर्वांचल के हर जनपदों में युवा परिवार सेवा समिति का संगठन कार्य कर रहा है । यह संगठन बिभिन्न सामाजिक गतिविधि जैसे बाढ़ ग्रस्त क्षेत्रों में राहत सामग्री का वितरण, निशुल्क स्वास्थ्य कैम्प, जरुरतमंद लोगों को रक्त दान, अभाव ग्रस्त क्षेत्रों में निःशुक्ल शिक्षा , कोविड महामारी के समय मे घर घर दवाइयों व भोजन का वितरण जैसे अनेक समाज के कार्यो में संलग्न रहता है।कार्यक्रम में उपस्थित युवाओं ने ध्यान की गहराइयों में जाने का सूत्र सीखा कर अनवरत आगे साधना करने का भी संकल्प लिया। कार्यक्रम में पूर्वांचल के हजारों युवाओं की उपस्थिति रही। बिसिष्ठ अथिति डॉ सत्या पांडेय जी, डॉ गोपाल प्रसाद जी ने भी अपने विचार प्रकट किया।

