रिपोर्ट अनिल कुमार
लखीमपुर खीरी। जिले के अंतर्गत तहसील मितौली के ग्राम कस्ता में बने सिंचाई विभाग का निरीक्षण भवन अंग्रेजों के जमाने के समय का है अंग्रेजों पूरा ध्यान लगान की अधिक से अधिक वसूली पर था उन्हें पता था कि अनाज के अधिक उत्पादन से लगान भी ज्यादा मिलेगा इसके लिए सिचाई की व्यवस्था जरूरी थी अंग्रेजों ने इसके लिए देश में कृत्रिम नहरों का तंत्र विकसित किया भारतीयों पर अंग्रेजों के जुल्म के तमाम किस्से हैं, बिना लगान दिए फसलों की सिचाई के लिए नहर से पानी लेने पर जुल्म होते थे, कोड़े बरसाए जाते थे, जेलों में बंद रखा जाता था पानी की निगरानी के लिए नहर कोठी का निर्माण हुआ था
नहर कोठियों में पानी के लगान से संबंधित मुकदमों की सुनवाई होती थी घोड़ों के अस्तबल, व्यायामशाला, छोटा चर्च, यातना घर, हवालात, तार घर आदि की सुविधा भी मौजूद थी अंग्रेज पद्धति का कुआं भी था बगैर अंग्रेजों की अनुमति के सिचाई तो दूर नहर का पानी पीने पर भी रोक थी कस्ता में नहर के किनारे कर्मचारियों के रहने के लिए बनाए गए निरीक्षण भवन आज देखरेख के अभाव में खंडहर के रूप में तब्दील हो चुके हैं कस्ता कस्बे के पूरब नहर के पास सन 1928 में बनाए गए निरीक्षण भवन के दरवाजे खिड़कियां चोरों द्वारा तोड़कर चुरा लिए गए हैं। साथ ही ये भवन में वर्तमान में अपराधियों की पनाहगाह बनते नजर आ रहे हैं बताते हैं इस नहर कोठी की देखरेख के लिए बेलदार रखे गए थे, किंतु आज बेलदार भी दूर-दूर तक नहीं दिखाई देते हैं कस्ता नहर कोठी के सभी भवन खंडहर और गंदगी का पर्याय बन चुके हैं नहर कोठी में बने कमरों के अंदर पशुओं का गोबर और गन्ने की पत्ती पड़ी रहती है कस्ता कोठी में लगे विशालकाय लिप्टिस तथा आम के पेड़ विभाग द्वारा बिक्री कर दिए गए थे उसके बाद ही से खंडहर होती गई कोठी की ठीक से देखरेख नहीं हो पाई नीलामी के पैसों से इस कोठी में क्या कार्य करवाए गए यह तो जमीनी स्तर पर देखने से ही मालूम होता है चारों ओर जंगली झाड़ियां दिखाई पड़ती हैं। आखिर नहर विभाग के अधिकारी अब तक कस्ता, लालपुर तथा मोहम्मदपुर नगरा की नहर कोठियों के रखरखाव के लिए कोई कदम क्यों नहीं उठा रहे। जल्द अगर इस पर विभाग ने ध्यान नहीं दिया तो यह कोठी सिर्फ कागजों में ही नज़र आयेगी और आपने बच्चों को आज के युवा कहानी सुनाएंगे।
