अंग्रेज हुकमरानों द्वारा निर्मित इस ऐतिहासिक बैराज से यूपी के रायबरेली तक 22 लाख एकड़ से अधिक कृषि भूमि की सिंचाई की जाती है। भारत-नेपाल के बीच आवागमन का भी कार्य भी इसी बैराज से होता है, लेकिन परिसंपत्तियों के बंटवारे के अभाव में उत्तराखंड की भूमि पर निर्मित बैराज पर आज भी यूपी का ही अधिकार है
बैराज का निर्माण कार्य वर्ष 1918 में शुरू हुआ था। 11 दिसंबर 1928 को तत्कालीन यूपी संयुक्त प्रांत के गवर्नर सर मैलकम हेली ने शारदा बैराज राष्ट्र को समर्पित किया था। बैराज निर्माण का रोचक और रोमांच भरा इतिहास है। वर्ष 1856-57 में मद्रास इंजीनियर कोर के लेफ्टीनेंट एंडरसन ने बनबसा को नहर निकालने के लिए उपयुक्त फुटहिल (जहां से पहाड़ शुरू होते हैं) पाया। सर्वे शुरू किया गया, लेकिन वर्ष 1857 के विद्रोह में उनके सभी अभिलेख नष्ट हो गए। उनकी एकमात्र बची डायरी के आधार पर वर्ष 1867 में कैप्टन फारबेस ने सर्वे कार्य आगे बढ़ाया। प्रथम विश्व युद्ध के बाद सर बरनार्ड डायरले ने बैराज की डिजाइनिंग की वर्ष 1918 में बैराज निर्माण शुरू हुआ जो 1928 में पूरा हुआ।
शारदा बैराज निर्माण में करीब साढ़े 9 करोड़ रुपये की लागत आई थी और करीब 25 हजार मजदूरों ने बैराज निर्माण का कार्य किया। बीमारी, हादसे, डाकुओं से मुठभेड़ आदि में करीब एक हजार लोगों की जानें गई थी। शारदा हेडवर्क्स के एसडीओ बृजेश मौर्य के मुताबिक नियमित रखरखाव से बैराज कई वर्षों तक सिंचाई में सहयोग देता रहेगा। सीओ आरएस रौतेला ने बताया कि बैराज की सुरक्षा उत्तराखंड पुलिस के जिम्मे है। इसके लिए यूपी सिंचाई विभाग से किसी तरह का आर्थिक सहयोग नहीं मिल रहा है।
*हुड्डी नदी के नीचे से निकाला गया है नहर को*
बनबसा (चंपावत)। बनबसा बैराज से करीब आठ किमी दूर धनुषपुल पर शारदा नहर के पानी को आगे प्रवाहित करने के लिए साइफन विधि अपनाकर नहर को हुड्डी नदी के नीचे से निकाला गया है। इसके लिए नहर के ऊपर करीब डेढ़ सौ मीटर चौड़ा और ढाई सौ मीटर लंबाई का आरसीसी का प्लेटफार्म बनाया गया है। पिछले नौ दशकों से उसी प्लेटफार्म से हुड्डी नदी निरंतर पश्चिम से पूर्व की ओर अपने मार्ग पर बह रही है और शारदा नहर का पानी भी उत्तरी दिशा से दक्षिण की ओर नदी के नीचे से गंतव्य तक पहुंच रहा है।
बैराज की लंबाई 598 मीटर बैराज संचालन को बने हैं 34 गेट बैराज से निकली नहर की लंबाई (बनबसा से रायबरेली तक) करीब 550 किमी है।
बैराज की जल घनत्व सहन क्षमता 6 लाख क्यूसेक है।
अब तक अधिकतम 5 लाख 44 हजार क्यूसेक पानी 18 जून 2013 को प्रभावित हो चुका है।
नहर संचालन को बने हैं 16 गेट निर्माण के समय आधुनिक तकनीक पर किया गया था फिश लैडर (मछली सीढ़ी) और सिल्ट इजेक्टर (रेत निकासी) का निर्माण नहर की फुललोड क्षमता है 11500 क्यूसेक नेपाल को भी उनकी जरूरत के मुताबिक पानी दिया जाता है।
