नीमगांव खीरी। लखीमपुर खीरी जिले में भारत सरकार व खेल मंत्रालय द्वारा संचालित एसपीईएल (स्टूडेंट पुलिस एक्सपीरियांस लर्निंग) अभियान की श्रृंखला में आज खीरी जनपद के क्रेन ग्रोवर डिग्री कॉलेज गोला गोकर्णनाथ में पढ़ने वाले बच्चों को चयनित कर उनके स्थानीय थाने में SPEL अभियान के तहत संबंधित थाने में SPEL प्रभारी नियुक्ति कर उनको पुलिस की कार्यशैली से रूबरू कराया जा रहा है, विभागीय सूत्रों के मुताबिक यह अभियान 30 दिनों का होने वाला है और जिसमें प्रत्येक दिन छात्र व छात्राओं को 4 घंटे की पुलिस कार्यशैली से रूबरू हो रहे हैं।
वहीं छात्राओं को प्रशिक्षित कर रहे थाना अध्यक्ष प्रवीर कुमार गौतम ने छात्र व छात्राओं को बताया कि बढ़ रहे अपराध पर कैसे लगाम लगानी है, उन्होंने बताया कि खाकी की कार्यवाही तभी प्रभावी होती जब अपराधी में पुलिस का खौफ हो, और वह अपराध करने से पहले दस बार सोचें,हालांकि अपराध को रोकथाम तंत्र इस विचार पर आधारित है कि अपराध विशिष्ट परिस्थितियों में होता है जब एक संभावित अपराधी और एक उपयुक्त लक्ष्य एक सक्षम संरक्षक की अनुपस्थिति में एक साथ आते हैं
इस आधार पर और इस तथ्य को ध्यान में रखते हुए कि लोग अलग-अलग परिस्थितियों में अलग-अलग तरह से व्यवहार करते हैं, पुलिस के पास उन स्थितियों की पहचान करने का अवसर होगा जहाँ संभावित अपराधी और उपयुक्त लक्ष्य मिल सकते हैं और अपराध को रोकने के लिए स्थिति को बदला जा सकता है।
पुलिस को दंगा फसादों से निपटने के लिए भी एक तरह से प्रशिक्षित किया जाता और सिखाई गई कार्यवाही भी जटिल होती हैं
महिला अपराधों में अधिक तर देखने को मिलता हैं कि अधिकांश मामले यौन शोषण, उत्पीड़न,दहेज उत्पीड़न जैसे मामले सामने आ रहे हैं, कई बार देखने को मिलता है कि पीड़िता चुप रहकर अपराध को सहती रहती हैं, और हो रहे अपराध को छुपाने से समय पर कार्यवाही न होना भी महिला अपराधों में बढ़ौतरी का मुख्य कारण बन गया है
वहीं प्रशिक्षित हो रहे छात्र छात्राओं को SPEL प्रभारी उप निरीक्षक जितेंद्र पाल सिंह व थाना अध्यक्ष प्रवीर कुमार गौतम ने मुखबिर तंत्र के बारे में जानकारी दी उन्होंने बताया कि पुलिस अपना मुखबिर तंत्र किस तरह बनाती हैं और अपराधियों की कैसे पहचान करती हैं, मुखबिरों को गुप्तभाषा में नाम दिया जाता जैसे कबूतर,रामलाल, छबीला नामों को प्रयोग करती हैं।
हालांकि आज के आधुनिक समय में पुलिस भी काफी हद तक आधुनिकता से लैस हो गई है गंभीर और सनसनी फैलाने वाले अपराधियों को पकड़ने में सार्वलांस सेल व फॉरेसिंक टीम व एलईसी समेत स्वाट टीमों की मदद से काफी आसान हो गया है।
