कच्चा तेल हुआ 32% सस्ता, लेकिन पेट्रोल-डीजल के दाम वहीं, घाटे से उबर रही कंपनियां, चाहे तो 18 रु./ली. कीमतें घटाई जा सकती है, फ्यूल के सस्ते विकल्प पर हो रहा फोकस
पेट्रोल-डीजल की कीमतें बढ़ाने में जितनी तेजी दिखाई जाती है, कीमतें घटाने में उतनी ही सुस्ती नजर आती है. जून 2022 में कच्चा तेल 9,003 रुपए/बैरल यानी करीब 57 रुपए प्रति लीटर था, जो जनवरी 23 में 6,222 रुपए/बैरल यानी 39 रुपए/लीटर पर आ गया, फिर भी 7 माह में पेट्रोल-डीजल के दाम वहीं हैं. कच्चा तेल सस्ता होने से सरकारें पेट्रोल-डीजल पर प्रति लीटर 29 रुपए और तेल कंपनियां 6.41 रुपए से ज्यादा कमा रही हैं.
अर्थशास्त्री अरुण कुमार कहते हैं, पेट्रोल-डीजल के मौजूदा दाम 90 डॉलर/बैरल के आधार पर तय हुए थे. फिर दाम 120 डॉलर तक गए. इसलिए कंपनियों का तर्क वाजिब था कि नुकसान हो रहा है, लेकिन फिर दाम नीचे आए और कंपनियां मुनाफे में आ गईं. वे नवंबर में ही दाम घटाने की स्थिति में थीं. अब तो कच्चा तेल 75 डॉलर के आसपास है. इस आधार पर पेट्रोल 18 रुपए/लीटर तक सस्ता कर सकते हैं. इंडिया रेटिंग के मुख्य अर्थशास्त्री देवेंद्र पंत कहते हैं कि कच्चे तेल के दाम यूं ही गिरते रहे तो कंपनियां जल्द कीमतें कम कर सकेंगी.
ICICI सिक्योरिटीज की ताजा रिपोर्ट में कहा गया है कि 31 दिसंबर को खत्म हुई तीसरी तिमाही में सभी 12 तेल और गैस कंपनियों को 66,100 करोड़ का मुनाफा हो सकता है, जो पिछली बार से 82% ज्यादा है. दिसंबर तिमाही में सभी तेल व गैस कंपनियों की शुद्ध आय चार गुना बढ़कर 31,200 करोड़ रुपए तक पहुंच सकती है. ब्रोकर फर्म के मुताबिक, तेल मार्केटिंग कंपनियों का इस मुनाफे में सबसे ज्यादा योगदान है. रिफाइनरीज कंपनियों का ग्रॉस रिफाइनिंग मार्जिन 10.5-12.4 डॉलर/बैरल है. लाभ बढ़ने की सबसे बड़ी वजह यही है. कंपनियों को उम्मीद है कि कच्चे तेल के दाम लंबे समय तक 73.5-74.1 डॉलर प्रति बैरल के आसपास ही रहेंगे यानी आगे भी मुनाफा दिख रहा है. 2022-23 की दूसरी तिमाही के दौरान तेल कंपनियों को सस्ता तेल बेचने से नुकसान हुआ था. इसका असर सभी कंपनियों के तिमाही नतीजों में देखने को मिला था, पर अब ये लाभ में हैं.
वहीं घरेलू ऑटोमोबाइल इंडस्ट्री तेज बदलाव के दौर से गुजर रही है. नई दिल्ली में चल रहे ऑटो एक्सपो में कंपनियों का फोकस जहां ग्राहकों को इलेक्ट्रिक व्हीकल के अलावा ईंधन के अन्य सस्ते और उन्नत विकल्प देने पर रहा. वहीं ग्राहक भी ज्यादा खर्च करने के लिए तैयार नजर आए. कुछ कंपनियों ने ऐसे इंजन सिस्टम भी दिखाए, जिसे पेट्रोल-डीजल गाड़ी में फिट करके उसे चलाने के लिए हाइड्रोजन, बायो-डीजल, एथेनॉल, सीएनजी और एलएनजी में से कोई भी विकल्प अपनाया जा सकता है. डीजल इंजन कंपनी कोलंबस ने ‘फ्यूल एग्नॉस्टिक इंजन सिस्टम’ का प्रोडक्शन की अनूठी टेक्नोलॉजी शुरू करने की घोषणा की है. ये मल्टिपल फ्यूल इंजन हाइड्रोजन, बायो-डीजल, एथेनॉल, सीएनजी, एलएनजी और अन्य ईंधन पर भी चल सकते हैं.
महंगाई घटने के बीच टूथपेस्ट-साबुन जैसे डेली यूज आइटम की कीमतें 2% से 58% बढ़ीं
एक तरफ जहां दिसंबर में खुदरा महंगाई घटकर साल भर के निचले स्तर पर आने से आम उपभोक्ता को खुशी मिली और अब थोक महंगाई दर में भी राहत की खबर है. वहीं दूसरी तरफ कुछ प्रमुख दैनिक उपयोग की वस्तुएं बनाने वाली FMCG कंपनियों ने जनवरी से अपने उत्पादों में 2% से 58% तक बढ़ोतरी करके उसकी जेब पर बोझ फिर बढ़ा दिया है. जनवरी 2022 में 3% से 20% की बढ़ोतरी के बाद FMCG कंपनियों द्वारा साल भर में तीसरी बार यह बड़ी वृद्धि की गई है. इससे पहले मई 2022 में कच्चे माल की कीमतें बढ़ने की वजह से FMCG कंपनियों ने कीमतों में बढ़ोतरी की थी.
मार्केट के आंकड़ों के मुताबिक, जनवरी में हिंदुस्तान यूनिलीवर, कोलगेट, पामोलिव के अलावा कैडबरी और ओरियो जैसे ब्रांड बनाने वाली कंपनी मोंडेलेज इंडिया ने अपने विभिन्न उत्पादों की कीमतें बढ़ाई हैं. इन कंपनियों ने कई उत्पादों के वजन में भी कमी की है. रेटिंग एजेंसी क्रिसिल के डायरेक्टर पूषन शर्मा के मुताबिक चालू वित्त वर्ष में FMCG कंपनियों की ग्रोथ 7-9% तक रहेगी और कंपनियां इनपुट लागत का बोझ ग्राहकों पर डालने के लिए कीमतों में बढ़ोतरी कर सकती हैं.
बीते कुछ समय से FMCG कंपनियों की बिक्री में एक तिहाई से ज्यादा हिस्सेदारी रखने वाले ग्रामीण सेक्टर में बिक्री धीमी रही थी और कंपनियों को अपना मार्जिन घटाकर काम करना पड़ रहा था, लेकिन अब खेती में लाभ, सरकारी प्रोत्साहन और अच्छी फसल के चलते इस साल कंपनियों को ग्रामीण मांग में बढ़ोतरी की उम्मीद नजर आ रही है. यही वजह है कि कंपनियां अपना मार्जिन वापस बढ़ाने के लिए कीमतों में बढ़ोतरी कर रही हैं.
