लखीमपुर खीरी | भारत सरकार द्वारा संचालित अतिमहत्वपूर्ण मिशन जलजीवन मिशन भ्रष्टाचार की भेंट चढ़ गया। जिले के किसी जनप्रतिधि को कानों कान खबर भी नहीं लगी। एन.जी.ओ. ने जिले में फर्जी तरीके से काम दिखा कर पैसा हड़प लिया।
सरकार की मंसा हर घर को शुद्ध जल मिल सके
जानकारी के मुताबिक भारत सरकार द्वारा संचालित जलजीवन मिशन जिसका उद्देश्य हर घर नल से जल मिशन के रूप में हर घर तक सुरक्षित पेयजल उपलब्ध कराना था। राज्य स्तर पर जिसके लिए राज्य – पेयजल मिशन नमामि गंगे जनपद स्तर पर जल निगम तथा एक पर्यवेक्षण यूनिट की स्थापना की गयी ताकि एक निश्चित समयावधि में सन् २०२५ तक हर घर नल से जल पहुँच सके
जनपद स्तर पर कार्यरत एन०जी० ओ० के कार्यों पर निगरानी हो सके लेकिन जनपद स्तर पर नामित निगरानी एजेन्सियों की घोर लापरवाही के चलते सरकार के अति महत्वपूर्ण मिशन को एन.जी.ओ. ने ठेंगा दिखा दिया। जनपद लखीमपुर में उजाला वेलफेयर सोसाइटी को जल जाँच के प्रशिक्षण के लिए राज्य पेयजल मिशन ने नामित किया था। जल जाँच किट शासन स्तर से बहुत पहले उपलब्ध हो गये थे।
योजना का लक्ष्य
योजना का लक्ष्य ग्राम सभा के प्रत्येक राजस्व गांव से पाँच उत्साही महिलाओं को जल जाँच के लिए प्रशिक्षित प्रशिक्षकों के द्वारा प्रशिक्षण देकर तैयार किया जाना था। लेकिन एन.जी. ओ ने पैसा बचाने के चक्कर में अप्रशिक्षित लोगों से प्रशिक्षण मानकों को ताख पर रख कर कराया। प्रशिक्षण प्राप्त करने वाली महिलाओं ने बताया किसी दिन चाय समोसा देकर दिन भर बैठाये रखा।
प्रशिक्षण में आई महिलाओं को नहीं दिए गए प्रमाण पत्र
हद तो तब हो गयी जब लखीमपुर (सदर) ब्लाक में प्रशिक्षण में आयी महिलाओं को अंतिम दिन यह कह कर भगा दिया कि प्रमाण पत्र बाद में आपके घर पहुँच जायेगा खाना नाश्ता भी नहीं दिया रविवार छुट्टी का दिन होने की वजह ब्लाक में अधिकारी कर्मचारी भी मौजूद नहीं थे। महिलाएँ किसने शिकायत करें। बताते हैं फोटो खींचने के लिए कुछेक महिलाओं को पैकेट बाँटकर इति श्री कर ली गयी प्रशिक्षण समापन पर महिलाओं को सादा प्रमाण पत्र देकर फोटो – खिचवाकर वापस ले लिये गये महिलाओं का आरोप है कि जल जाँच किट भी नहीं दिया गया ।
जांच किट की वैधता 15 मंथ थी
दिया भी कैसे जाता जनपद को मिले जाँच फिट वैध ही नहीं रह गये। जाँच किटों पर लगे लेबल पर निर्माण तिथि 06/21 अंकित है और 15 महीनों के लिए वैधता दी हुई है। इस तरह जाँच किटों की वैधता 30 सितम्बर को स्वत ही समाप्त हो गयी। ये सब गंभीर सवाल हैं इनके जबाब किसी के पास नहीं है। फिलहाल इतना बड़ा घपला करने के बाद भी उजाला वेलफेयर सोसाइटी तकनीकी प्रशिक्षण देने की तैयारी कर रही है जबकि अभी कुछ विकास खण्डो में जल जाँच प्रशिक्षण पूरा नहीं हो पाया है। दिलचस्प बात यह है कि विकास खण्ड स्तर पर संस्था द्वारा प्रशिक्षण के लिए 200 से 250 महिलाओं को बुलाया जाना था। जबकि जनपद स्तर पर किसी भी ब्लाक में उक्त क्षमता के सभागार नहीं है। देखना यह है कि इतने बड़े घोटाले में किस किस की गर्दन फंसने वाली है वक्त बतायेगा। मितौली ब्लाक सहित जनपद के सभी ब्लॉकों का भ्रमण, हर जगह स्थिति एक जैसी जो जांच किस मिलनी थी एक्सपायरी पहले हो गई उसके बाद मिली जांच किट तो योजना कैसे कागजों पर फलीभूत हो रही है प्रशिक्षण तिथि स्वयं बयां कर रही है कि क्या हो रहा है
जल जांच मिशन योजना ने विकासखंड मितौली के करीब 20 गांव का भ्रमण करके जानी योजना की हकी अलार्म का कत रसूलपुर सरैया खुर्दा अबगांव पिपरझला समरसेपुर कानाखेड़ा कस्ता कल्लिया रामपुर दतेली कला मुरईताजपुर ओड़हरा निमचेनी भीखमपुर गणेशपुर जानकीनगर ग्रंट किरमानी दरी नगरा अतरौली बरेली गड़ी ब्राहिमपुर सहित किसी भी ग्राम पंचायत में चली जल जांच योजना महज संबंधित एजेंसियों द्वारा की गई खानापूर्ति,
