पंकज कुमार गौतम( मुख्य संपादक)
मैगलगंज खीरी। पंचशील विश्व धम्म ध्वज यात्रा भाजपा प्रदेश प्रवक्ता एवं पूर्व राज्यसभा सांसद जुगल किशोर ने सर्वप्रथम पूज्य भंते गणों की उपस्थिति में तथागत गौतम बुद्ध के चरणों में पुष्प अर्पित करते हुए श्रीपाल गेस्ट हाउस से होते हुए खखरा मोड तक भगवान बुद्ध के जयकारों के साथ बड़े हर्षोल्लास के साथ निकाली गई। यह पद यात्रा लगभग एक किलोमीटर की थी। मैगलगंज क्षेत्र में पहली बार विश्व धम्म ध्वज यात्रा निकाल कर इतिहास रचने का काम किया।

जुगुल किशोर को माल्या पहनाते हुए

उत्तर प्रदेश प्रवक्ता जुगुल किशोर ने कहा बौद्ध धम्म विश्व शांति का धम्म हैं जो भगवान बुद्ध ने दिया था।और सबसे बड़ा दुनिया का धम्म है इसको अपना के महान हो सकता है। बौद्ध जगत में 8 जनवरी 1880 का दिन विशेष महत्व रखता है क्योंकि इसी दिन धम्म ध्वज की स्थापना हुई थी यह धम्मा ध्वज संपूर्ण विश्व को शांति प्रगति मानवतावाद और समाज कल्याण की सदैव प्रेरणा देता है।
धम्म का प्रचार और प्रसार के लिए संपूर्ण विश्व में बौद्ध धर्म का एक ही प्रतीक होना चाहिए इसी विचार के साथ श्रीलंका में बौद्ध ध्वज की रचना की गई थी।
बौद्ध ध्वज की रचना की बात की जाए तो उसमें नीला,पीला,लाल सफेद और केसरी रंगों का प्रयोग किया गया। विश्व बौद्ध ध्वज पहली बार 1885 में श्रीलंका में फहराया गया था।बौद्ध ध्वज बौद्ध धर्म का प्रतिनिधित्व करता है और यह दुनिया भर में आस्था और शांति का प्रतीक है। बौद्ध धर्म के जनक और पहले अमेरिकी बुद्धिस्ट सेवानिवृत कर्नल हेनरी स्टील ओलकोट थे। बौद्ध ध्वज या पंचशील ध्वज के निर्माण में इनका महत्वपूर्ण योगदान रहा।श्रीलंका में इन्होंने बौद्ध धर्म के पुनर्वस्थान का काम किया साथ ही श्रीलंका में करीब 400 बौद्ध स्कूलों और कॉलेज की स्थापना की थी इसीलिए हेनरी स्टील ओल कोट को श्रीलंका में धार्मिक राष्ट्रीय पुनरुउत्थान लिए आज भी नायक के रूप में जाना जाता है
इस यात्रा में हजारों की संख्या में महिलाएं पुरुष एवं बालिकाएं शामिल रहीं हाथों में पंचशील के झंडे और नारे के साथ पदयात्रा निकाली गई। इस अवसर पर विश्वराज गौतम महेश चंद्र राहुल बौद्धाचार्य,संजय कुमार, अखिलेश जोहर,रामचंद्र बोधाचार्य,सोमनाथ,पंकज कुमार गौतम,सोनू गौतम सहित सम्मानित लोग महिलाएं एवं मौजूद रहे।

