लखीमपुर खीरी 6 मार्च भारतीय गन्ना अनुसंधान संस्थान द्वारा संचालित कृषि विज्ञान केंद्र मझरा लखीमपुर में पशुधन प्रसार अधिकारियों का पशुजन्य बीमारियों की पहचान एवं बचाव विषय पर प्रशिक्षण कार्यक्रम का आयोजन किया गया। कार्यक्रम के मुख्य अतिथि डॉ सोमदेव सिंह चौहान मुख्य पशु चिकित्सा अधिकारी लखीमपुर थे। कार्यक्रम का शुभारंभ केंद्र के प्रधान वैज्ञानिक एवं अध्यक्ष डॉ निरंजन लाल ने पधारे हुए सभी अधिकारियों के स्वागत संबोधन से किया डॉ सोमदेव सिंह चौहान ने अपने व्याख्यान में बताया कि आज के समय में बहुत सी नई नई पशुजन्य बीमारियों का जन्म हो रहा है ऐसे में यह आवश्यक हो जाता है कि पशु जनित बीमारियों के बारे में सभी पशुधन प्रसार अधिकारियों को ज्यादा से ज्यादा जानकारी होनी चाहिए क्योंकि यह पशुपालन विभाग के वह कर्मचारी हैं जो सीधे पशुपालकों के संपर्क में रहते हैं इसलिए आज के समय में इस प्रकार के प्रशिक्षणों की बहुत ही आवश्यकता है जो पशुपालकों तक जानकारी पहुंचा कर पशुजन्य बीमारियों की रोकथाम में अहम भूमिका निभा सकते हैं। केंद्र के प्रधान वैज्ञानिक एवं अध्यक्ष डॉ निरंजन लाल ने अपने व्याख्यान में बताया कि पशुधन प्रसार अधिकारी किस तरह से अपने व्यवसायिक कारणों की वजह से पशुजन्य बीमारियों की चपेट में आ सकते हैं। केंद्र के पशुपालन विशेषज्ञ डॉ अरविंद कुमार वर्मा ने प्रमुख पशुजन्य बीमारियों के बारे में विस्तार से चर्चा करते हुए बताया कि पशुजन्य (जूनोटिक) बीमारियां वह बीमारियां होती हैं जो पशुओं से इंसानों में एवं इंसानों से पशुओं में फैलती हैं मुख्य पशुजन्य बीमारियां जैसे ब्रुसेलोसिस, एंथ्रेक्स, रेबीज, बर्ड फ्लू, सिस्टिसरकोसिस लिस्टेरियोसिस, लेप्टोसिरोसिस, बोवाइन ट्यूबरक्लोसिस, इंसेफेलाइटिस, स्वाइन फ्लू ग्लैंडर आदि बीमारियों की पहचान के लक्षण एवं बचाव के उपाय बताए। ब्रुसेलोसिस बीमारी आर्थिक नुकसान के लिए जिम्मेदार है जिसमें गर्भपात के कारण दुग्ध उत्पादकता में कमी, बांझपन के परिणाम स्वरूप बछड़ा उत्पन्न में दीर्घ अंतराल, स्थायी रूप से बांझपन और गर्भाशय की सूजन से मृत्यु प्रमुख हैं। एक अनुमान के अनुसार देश में ब्रुसेलोसिस से प्रतिवर्ष लगभग 22,000 करोड़ रूपये का नुकसान होता है। पशुजन्य बीमारियां आर्थिक हानि के साथ-साथ मानव स्वास्थ्य के लिए भी एक बहुत बड़ी चुनौती हैं साथ ही साथ इन बीमारियों की वजह से अंतरराष्ट्रीय मांस बाजार एवं डेयरी उत्पादों के बाजार भी प्रभावित होते हैं जिसकी वजह से किसी भी देश की अर्थव्यवस्था पर प्रतिकूल प्रभाव पड़ता है केंद्र के उद्यानिकी विशेषज्ञ आर्य देश दीपक मिश्रा ने विभिन्न प्रकार की चारा फसलों के उत्पादन के बारे में विस्तार से बताया। अंत में राजकीय पशुधन केंद्र एवं कृषि फार्म पर भ्रमण करवाया गया जिसमें पशुधन केंद्र पर होने वाली रोजमर्रा की गतिविधियों के बारे में जानकारी दी गई तथा यह भी बताया गया कि किस तरह से पशुपालन प्रबंधन से पशुजन्य बीमारियों को रोका जा सकता है इस कार्यक्रम में जिले विभिन्न तहसीलों के 25 पशुधन प्रसार अधिकारियों ने भाग लिया।
