पंकज कुमार गौतम
मितौली खीरी। तहसील मितौली क्षेत्र के ग्राम कल्लुआ मोती में 45 वी मां गायत्री सेवा संस्थान के तत्वाधाम में आयोजित की पांच दिवसीय गायत्री महायज्ञ आयोजित की गई कार्यक्रम की श्रृंखला में नैमिषारण्य धाम से पधारे बक्ता सुरेश चंद्र अवस्थी जी के मुखारविंद से सत्य की रक्षा लिए अपना राज्य पाट दान कर अपने आप व अपनी धर्म पत्नी अपने पुत्र को बेचकर गुरु की दक्षिणा पूरी की और सत्य पर आंच नहीं आने दिया ऐसे महा दानी की कथा का अमृत पान श्रोताओं को कराया।
कथा ब्यास ने ऋषि विश्वामित्र द्वारा राजा हरिशचंद्र द्वारा धर्म की परीक्षा के लिए उनसे स्वप्न में दान स्वरूप उनका संपूर्ण राज्य मांग लिया गया था। मानव का सबसे बड़ा धर्म होता है गरीब, निर्धन, असहाय लोगों की मदद करने वाले मनुष्य अवतारी होते हैं, इसीलिए साधारण भाषा में मदद करने वाले को आज भी लोग भगवान का दर्जा देते हैं।
सत्यवादी हरिश्चंद्र की कथा का रस पान कर रहे श्रोताओं को पत्नी और पुत्र को बेचकर और स्यमं बिक कर
गुरु की दक्षिणा भरी ऐसे सत्य वादी की कथा सुनकर श्रोता भाव विभोर हो गये कथा ब्यास आचार्य निर्देश मिश्र ने अपने मुखारविंद से अमृत मयी वाणी से श्रीमद्भागवत कथा बहुत ही मार्मिक ढंग से सुनायी।
यज्ञ के मुख्य संरक्षक रहे स्मृति शेष पुजारी श्रीपाल के संकल्प को उनके छोटे पुत्र गायत्री प्रसाद मिश्र के कुशल संचालन में यह गायत्री महायज्ञ पूर्णाहुति होने के उपरांत कन्या भोज, विसाल भंडारा, यज्ञोपवीत संस्कार, तथा मांगलिक कार्यक्रम सम्पन्न हुए। इस अवसर पर गायत्री सेवा संस्थान के सदस्य तथा आयोजक सहित क्षेत्र के सम्भ्रान्त नागरिक मांतांएं बहने भक्तगण मौजूद रहीं।

