लखनऊ। दिल्ली हाईकोर्ट द्वारा प्रेस की स्वतंत्रता और उसकी जवाबदेही को लेकर की गई महत्वपूर्ण टिप्पणी के बाद उत्तर प्रदेश मान्यता प्राप्त संवाददाता समिति (पुनर्गठित) ने 30 जुलाई से प्रस्तावित फर्जी पत्रकारों एवं “प्रेस” लिखे फर्जी वाहनों के विरुद्ध अभियान को और तेज करने का निर्णय लिया है। समिति के संयोजक प्रभात कुमार त्रिपाठी ने कहा कि न्यायालय की टिप्पणी इस बात का स्पष्ट संकेत है कि पत्रकारिता की गरिमा बनाए रखने के लिए फर्जी और गैर-जिम्मेदार तत्वों पर प्रभावी अंकुश लगाया जाना आवश्यक है।
प्रभात कुमार त्रिपाठी ने कहा कि दिल्ली हाईकोर्ट ने स्पष्ट किया है कि प्रेस की स्वतंत्रता लोकतंत्र का महत्वपूर्ण आधार है, लेकिन इसका दुरुपयोग किसी भी कीमत पर स्वीकार नहीं किया जा सकता। आज मोबाइल और माइक्रोफोन लेकर कोई भी स्वयं को पत्रकार बताने लगता है, जबकि उसके पास न तो पत्रकारिता का प्रशिक्षण होता है और न ही समाज के प्रति जवाबदेही। उन्होंने कहा कि समिति का अभियान वास्तविक पत्रकारों के विरुद्ध नहीं, बल्कि पत्रकारिता की आड़ में गलत गतिविधियां करने वाले फर्जी पत्रकारों तथा अवैध रूप से “प्रेस” लिखकर चलाए जा रहे वाहनों के खिलाफ है।
उन्होंने बताया कि 30 जुलाई को सुबह 10 बजे हजरतगंज चौराहे, लखनऊ से अभियान का शुभारंभ किया जाएगा। अभियान में समिति के अध्यक्ष विक्रम राव, महासचिव ज्ञानेश पाठक, सभी उपाध्यक्ष, प्रदेश पदाधिकारी तथा समिति की पूरी टीम उपस्थित रहेगी। इस संबंध में पुलिस आयुक्त, ट्रैफिक, डीआईजी सहित अन्य वरिष्ठ पुलिस अधिकारियों को पत्र भेजकर अभियान में सहयोग का अनुरोध किया गया है।
समिति के संयोजक प्रभात कुमार त्रिपाठी ने प्रदेश के सभी प्रिंट, डिजिटल और इलेक्ट्रॉनिक मीडिया से जुड़े पत्रकारों से इस अभियान में बढ़-चढ़कर भाग लेने का आह्वान किया है। उन्होंने कहा कि पत्रकारिता की विश्वसनीयता, समाज के विश्वास और लोकतंत्र के चौथे स्तंभ की गरिमा की रक्षा के लिए सभी जिम्मेदार पत्रकारों को एकजुट होना होगा।
समिति के प्रवक्ता एवं वरिष्ठ पत्रकार लक्ष्मीकांत तिवारी ने कहा कि फर्जी पत्रकारों और प्रेस का दुरुपयोग करने वाले लोगों के विरुद्ध यह अभियान किसी व्यक्ति विशेष के खिलाफ नहीं, बल्कि पत्रकारिता की साख बचाने का जन-जागरण अभियान है। उन्होंने कहा कि वास्तविक पत्रकारों की सक्रिय भागीदारी से यह अभियान पूरे प्रदेश में एक सकारात्मक संदेश देगा।

