पंकज कुमार
डॉ बाबासाहेब अंबेडकर जी की तुलना दुनिया में किसी से भी इन्सान से नहीं हो सकती। बहन कुमारी मायावती जी बाबा साहब को अपना गुरु मानती हैं। लेकिन जिस प्रकार बाबा साहब अंबेडकर जी को राजनीतिक कठिनाइयो के साथ संघर्ष करना पड़ा। ठीक उसी प्रकार बहन मायावती जी को भी राजनीतिक कठिनाइयों का संघर्ष करना पड़ रहा है।*
*बहन कुमारी मायावती जी उस दौर से गुजर रही हैं जिस दौर से कभी डॉ बी आर अम्बेडकर जी गुजरे थे। डॉ बी आर अम्बेडकर जी के साथ जो परिस्थितियां निर्मित की गईं थीं, ठीक वही परिस्थितियां आज बहन कुमारी मायावती जी के साथ निर्मित की जा रही हैं। डॉ बी आर अम्बेडकर जी भी बड़ी निष्ठा , ईमानदारी, बुद्धिमत्ता, और गहन शांति से सामाजिक परिवर्तन के लिए संघर्ष करते रहे। बहन कुमारी मायावती जी भी बड़ी निष्ठा, ईमानदारी, बुद्धिमत्ता और गहन शांति से सामाजिक परिवर्तन के लिए संघर्ष कर रही हैं। डॉ बी आर अम्बेडकर जी के सामने भी नकली नेतृत्व खड़ा किया गया था आज बहन कुमारी मायावती जी के सामने भी नकली नेतृत्व खड़ा किया जा रहा है। डॉ बी आर अम्बेडकर जी को भी संसद में नहीं जाने देने के भरपूर प्रयास किए गए। बहन कुमारी मायावती जी को भी संसद में नहीं जाने देने के भरपूर प्रयास किए जा रहे हैं। डॉ बी आर अम्बेडकर जी को समझने में हमें 50 साल लग गए। कहीं ऐसा न हो कि हमें बहन कुमारी मायावती जी को समझने में भी 50 साल लगें । यदि डॉ बी आर अम्बेडकर जी को अपेक्षित सहयोग मिला होता तो परिवर्तन की दिशा कुछ और ही होती, ठीक वैसे ही बहन कुमारी मायावती जी को अपेक्षित सहयोग मिलेगा तो परिवर्तन की दिशा कुछ ओर ही होगी। डॉ बी आर अम्बेडकर जी के साथ जो हुआ था वही इतिहास बहन कुमारी मायावती जी के साथ दोहराया जा रहा है। जिन्हें डॉ बी आर अम्बेडकर जी का सहयोग करना था वो भी नहीं कर पाए आज जिन्हें बहन कुमारी मायावती जी का सहयोग करना चाहिए वो भी नहीं कर पा रहे हैं। “सामाजिक और आर्थिक परिवर्तन” के लिए बहन कुमारी मायावती जी का कोई विकल्प नहीं। डॉ बी आर अम्बेडकर के संघर्ष से भी काफी लोग दुखी थे, बहन कुमारी मायावती जी के संघर्ष से भी काफी लोग दुखी हैं। डॉ बी आर अम्बेडकर जी के संघर्ष से आए परिणाम ने जैसे सबका भला किया ठीक वैसे ही मायावती जी के संघर्ष से आए परिणाम से भी अंततः सबका भला होगा। बहुजन समाज को बहन कुमारी मायावती जी के संघर्ष को समझना और समझकर उनको सहयोग करना आज बहुजन समाज की सबसे बड़ी जरूरत है।

