पंकज कुमार गौतम (मुख्य संपादक)
उत्तराखंड के सिलक्यारा टनल में 17 दिनों तक फँसे 41 बहादुर मजदूरों में से लोकसभा खीरी का एक बच्चा विधानसभा निघासन के ग्राम भैरमपुर से मंजीत भी था।
लखीमपुर खीरी के निघासन के गाँव भैरमपुर में डॉ पूर्वी वर्मा (कांग्रेस )आज उनके निवास स्थान पर पहुँच कर उनसे मुलाकात की, उनके स्वास्थ्य के बारे में जाना और और उनके धैर्य, हिम्मत और संघर्ष के लिए बधाई दी।
परिवार से मुलाकात करने पर पता चला कि एक साल पहले इनका भाई महाराष्ट्र में एक ठेकेदार के साथ काम करने गया था जिसमें उसकी मौत हो गयी, जिसका भी कोई पता नहीं चला है और मंजीत ने भी बताया कि उसे काम पर ले जाने पर न तो कोई सुरक्षा की बात कही गई, न कोई बीमा, न सरकार में कोई पंजीकरण और न ही कोई पी.एफ. खाते की सुविधा।
इतनी बड़ी वारदात हो गयी लेकिन सत्ता पक्ष का कोई प्रतिनिधि हाल जानने नहीं पहुँचा।
चूल्हे पर खाना बनाते देख उससे पूछा तो पता चला कि उसके पास गैस का सिलेंडर तो है लेकिन उस दोबारा भरा नहीं पाया।इतनी महंगाई में लोगों को घर चलाना मुश्किल हो गया है।इस सरकार की खोखली योजनाओं ने गरीब, मज़दूर, पिछड़ों का मज़ाक बना कर रखा है, रिकार्ड तोड़ महंगाई और रोजगार के बंद होते दरवाज़ों के चलते ही मंजीत जैसे हज़ारों युवा परिवार और घर छोड़ने को और दो जून की रोटी जोड़ने के लिए अपनी जान दांव पर लगाने को मजबूर हैं।

