मितौली खीरी। कस्बा स्थित मेला मैदान तहसील के ठीक सामने चल रहे विराट 24 कुंडीय नवचेतना जागरण गायत्री महायज्ञ एवं प्रज्ञा पुराण कथा को श्रवण कर श्रद्धालु भक्त भाव विभोर हो गए। साथ ही विभन्न प्रकार के कराये गए संस्कार।
कस्बे में चल रहे विराट 24 कुंडीय नवचेतना जागरण गायत्री महायज्ञ के तीसरे दिन भी हर रोज की तरह सुबह कई पारियों में श्रद्धालु भक्तों ने यज्ञ भगवान को आहुतियां प्रदान की गईं।24 कुंडीय गायत्री महायज्ञ एवं प्रज्ञा पूराण कथा युग ऋषि वेद मूर्ति तपोनिष्ठ पंडित श्रीराम शर्मा आचार्य एवं परम बन्दनीया माता भगवती देवी शर्मा के सूक्ष्म संरक्षण व ऋषि तंत्र के मार्गदर्शन में मानव मात्र को विश्वव्यापी संकटों से उबारने एवं सही रास्ते पर चलने का सन्मार्ग मिल सके। इसी मंगलमय उद्देश को लेकर कस्बे में में 24 कुंडीय गायत्री महा यज्ञ हरिद्वार से आये हुए प्रतिष्टित विद्वान आचार्यों द्वारा की जा रही है।इसमें अपनी अपनी श्रद्धा ,भावना व निष्ठा जोड़ते हुए यज्ञ भगवान से मंगलमय प्रार्थना के साथ आहुतियां समर्पित की जारही हैं। कार्यक्रम का शुभारंभ
12 नवम्बर दिन शनिवार से भब्य कलस यात्रा के साथ सुभारम्भ किया गया था ।
13 नवम्बर की साम को श्रीमद पावन प्रज्ञा पुराण की कथा सुनाई गई तथा सुबह 14 नवम्बर को प्रातः कालीन महायज्ञ एवं विभिन्न प्रकार के संस्कार परम विद्वान आचार्यों द्वारा कराए गए तथा शाम की बेला में दीप यज्ञ कराई गई शांतिकुंज से आए हुए परम विद्वान आचार्यों नहीं अपने मुखारविंद से श्रीमद्भागवत महापुराण की कथा में अष्टावक्र की कथा सुनाते हुए कहा अष्टावक्र की माता का नाम सुजाता था उनके पिता कहोड़ वेदपाठी और प्रकांड पंडित थे अष्टावक्र जब अपनी मां के गर्भ में पल रहे थे तब रोज उनके पिता से वेद सुनते थे एक दिन उनसे रहा नहीं गया और गर्व से ही कह बैठे रुको यह सब बकवास है, शास्त्रों में ज्ञान कहां ज्ञान तो स्वयं के भीतर है सत्य शास्त्रों में है ज्ञान तो स्वयं के भीतर है सत्य शास्त्रों में नहीं स्वयं में है शास्त्र तो शब्दों का संग्रह मात्र है यह सुनते ही उनके पिता क्रोधित हो गए पंडित का अहंकार जाग उठा जो अभी गर्भ में ही है उसने उनके ज्ञान पर प्रश्नचिन्ह लगा दिया। पिता तिलमिला गए। उन्हीं का वह पुत्र उन्हें उपदेश दे रहा था जो अभी पैदा भी नहीं हुआ क्रोध में अभिशाप दे दिया। जा जब तू पैदा होगा तो आठ अंगों से टेढ़ा होगा। इसलिए उनका नाम अष्टावक्र पड़ा।इस प्रकार भक्त कथा को सुन कर भाव विभोर हो गए।
