रिपोर्ट – पंकज कुमार गौतम (संपादक)
लखीमपुर खीरी। फाइलेरिया उन्मूलन अभियान के अन्तर्गत जनपद में एमडीए/आईडीए कार्यक्रम दिनांक 10 अगस्त 2024 से 2 सितम्बर 2024 तक संचालित किया जायेगा। जिसमें सोमवार, मंगलवार, गुरूवार व शुक्रवार को एक वर्ष से अधिक उम्र के बच्चों तथा महिला एवं पुरूषों को आशा एवं फ्रन्टलाइन वर्कर्स के माध्यम से घर-घर जाकर फाइलेरिया रोग की दवा खिलाई जायेगी। इस कार्यक्रम को सफल बनाने एवं जागरूकता फैलाने के उद्देश्य से एक मीडिया कार्यशाला का आयोजन सीएमओ कार्यालय के सभागार सीएमओ डॉ संतोष गुप्ता की अध्यक्षता में किया गया। जिसमें फाइलेरिया रोग के फैलने व होने के कारण सहित फाइलेरिया से बचाव में दवा को खिलाने के बारे में विस्तार से बताया गया।
मीडिया कार्यशाला में पत्रकारो से रूबरू होते हुये सीएमओ डॉ संतोष गुप्ता ने बताया कि 10 अगस्त से 2 सितम्बर तक फाइलेरिया उन्मूलन अभियान के अन्र्तगत जनपद में एमडीए/आईडीए कार्यक्रम चलाया जायेगा। फाइलेरिया रोग क्यूसिक मच्छर के काटने से होने वाला एक तरह का संक्रामक रोग है जिसे हाथी पांव/एलीफैन्टेसियासिस के नाम से भी जाना जाता है। जिनके लक्षण पैरो में सूजन, हाथ में सूजन, पुरूषों में हाइड्रोसील व महिलाओ के स्तनो में सूजन होती है। विगत वर्ष में 2890 रोगी जनपद में पाये गये जिसे देखते हुये इस वर्ष इसकी रोकथाम के लिये कार्यक्रम के शुरूआत से पहले मीडिया कार्यशाला का आयोजन व्यापक प्रचार प्रसार के लिये किया गया है। आईडीए 2024 जनपद के 10 ब्लाकों नकहा, बेहजम, फरधान, फूलबेहड़, रमियाबेहड़, पलिया, कुम्भी (गोला) एवं धौरहरा में संचालित किया जाना है। जिन पांच ब्लाकों में आईडीए संचालित नहीं किया जा रहा है, वहां सीएचसी पर बूथ लगाकर दवा का सेवन कराया जायेगा नगरीय क्षेत्र में 06 टीमें सार्वजनिक स्थानों पर एवं समस्त राजकीय एवं गैर सरकारी कार्यालयों में बूथ लगाकर दवा का सेवन करायेगी। प्रत्येक घर में 10 दिनांे के भीतर दो सदस्यीय 2091 टीमें भ्रमण करेंगी। वहीं 603 पर्यवेक्षकों द्वारा टीमों का सुपरविजन किया जायेगा। फाइलेरिया की दवा में आइवरमेक्टीन एवं अलबेन्डाजोल टैबलेट शामिल हैं, जो पूरी तरह से सुरक्षित है। मीडिया कार्यशाला में सीएमएस जिला चिकित्सालय डॉ आरके कोली सहित एसीएमओ डॉ एसपी मिश्रा, एसीएमओ डॉ अनिल गुप्ता, डिप्टी सीएमओ डॉ प्रमोद वर्मा, डीएमओ हरिशंकर वर्मा व पाथ से अमरीश कुमार सहित अन्य विभागीय अधिकारी व कर्मचारी भी मौजूद रहे।
होगें फाइलेरिया परजीवी तो मिलेंगे यह लक्षण-
जिन व्यक्तियों में फाइलेरिया के परजीवीं होते हैं, उन व्यक्तियों में दवा के सेवन के बाद चक्कर आना, जी मिचलाना, उल्टी आना या हल्का बुखार आदि लक्षण आ सकते हैं, जो कि एक से दो घण्टें में सामायन्ता समाप्त हो जाते हैं गम्भीर समस्या के समाधान हेतु ब्लाक व जनपद स्तर पर रैपिड रिस्पान्स टीम का गठन किया गया है।
याद रखने हेतु बातें-
आईडीए से बचाव की दवा सरकार द्वारा साल में एक बार घर-घर तक मुफत दी जाती है। डीईसी की गोली खाली पेट नहीं खानी है और अल्बेन्डाजोल की गोली चबाकर खानी होती है। दवा देने वाले स्वास्थ्यकर्मी के सामने सभी दवाओं को खाना जरूरी है।
मच्छरों से बचाव बेहद जरूरी-
सीएमओ डा संतोष गुप्ता ने बताया कि दवाओं के साथ यह भी जरूरी है कि मच्छरों के काटने से खुद को बचायें, क्योंकि अगर फाइलेरिया रोग से ग्रसित मरीज को कोई मच्छर काट ले और वह मच्छर किसी सामान्य व्यक्ति को काट ले तो यह परजीवी उस शरीर में पहुंच कर उसे संक्रमित कर सकता है। ऐसे में मच्छरदानी का प्रयोग करें और घर व घर के आस पास साफ-सफाई का विशेष ध्यान रखें।

