पंकज कुमार गौतम(मुख्य संपादक)
मितौली खीरी।भारतीय समन्वय संगठन (लक्ष्य) बहुजन लक्ष्य के तत्वाधान में त्याग समर्पण संघर्ष की प्रतिमूर्ति माता रमाबाई अंबेडकर की जयंती पर संगठन के समस्त माता बहनों ने माता रमाबाई अंबेडकर की जयंती पर बड़ी धूमधाम से जीवन शैली पर संगीत, एकांकी के माध्यम से जीवन का सुख – दुख दिखाकर समाज के लिए एक नई ऊर्जा मिसाल कायम की सचिन सिंह ( नितिन) ने कहा माता रमाबाई यशवंत की बीमारी के कारण हमेशा चिंता में डूबी रहती थीं, परंतु फिर भी वह इस बात का पूरा ख्याल रखती थीं कि बाबासाहब के कामों में कोई विघ्न न आए और उनकी पढ़ाई खराब न हो। माता रमाबाई अपने पति के प्रयत्न से कुछ लिखना पढ़ना भी सीख गई थीं। साधारणतः महापुरुषों के जीवन में यह एक सुखद बात होती रही है कि उन्हें जीवन साथी बहुत ही साधारण और अच्छे मिलते रहे। बाबासाहब भी ऐसे ही भाग्यशाली महापुरुषों में से एक थे, जिन्हें रमाबाई जैसी बहुत ही नेक और आज्ञाकारी जीवन साथी मिलीं धन्य है माता रमाबाई अंबेडकर जिन्होंने बाबा साहब अंबेडकर को देश की महानता को बेहतर बनाने के लिए अपने बच्चों को त्याग बलिदान कर दिया आपकी महानता हमारे दिल से लोगों के दिलों तक पहुंचने का काम करेंगे आप हमेशा बहुजनों के दिलों पर राज करेंगे आप हम सब की यादों में हमेशा अजर अमर रहेंगी सभी माताओं बहनों के हौसलों को सलाम करता हूं।

