पंकज कुमार गौतम( मुख्य संपादक )
मितौली खीरी। डीसीएम श्रीराम समूह की चीनी मिल अजबापुर में गन्ने की सबसे प्रसिद्ध अगेती प्रजाति 0238 के जनक पद्म श्री से सम्मानित डॉ बक्शी राम ने मिल क्षेत्र के तमाम गांवो में भ्रमण कर गन्ना प्रजातियों को देखा और किसानो को फ़सल कैसे सर्वोत्तम उपज देने के उपाय भी बताये इसी क्रम में ग्राम लल्हौआ में तमाम खेतो का निरीक्षण करने के बाद प्रगतिशील किसानो को 0238 प्रजाति बचाने के सम्बन्ध में टिप्स भी दिये। उन्होंने किसानो को सम्बोधित करते हुये कहा कि यदि सही दिशा में जोश और जुनून के साथ काम किया जाए तो सफलता जरूर मिलती है। आवश्यकता है लगातार प्रयास करने की। यदि बीच में असफल होते भी हैं तो पीछे नहीं हटना चाहिए। जो पीछे हट गया वह इतिहास नहीं रच सकता। लगातार प्रयास करने वाला ही इतिहास रच सकता है। लाेगों के लिए प्रेरणा का स्रोत बन सकता है।डा. बक्शी राम ने वर्ष 2009 के दौरान गन्ना की नई प्रजाति सीओ 0238 विकसित की थी। इस प्रजाति के विकसित होने के बाद गन्ना किसानों में नई ऊर्जा का संचार हुआ किन्तु 2020 में लाल सड़न रोग फ़ैल जाने के कारण किसानो को भारी नुकसान हो गया और इस कारण से इस प्रजाति का रकवा कम होता चला गया। किसानों को लाल सड़न रोग की पहचान करने व उनके रोकथाम करने के बारे में सुझाव देते हुये उन्होंने बताया कि लाल सड़न रोग के लक्षण मई-जून माह में दिखाई देने लगते हैं लेकिन बरसात के बाद जुलाई-अगस्त महीने में इस रोग के लक्षण बहुत तेजी से दिखाई पड़ते हैं. किसान रोग ग्रसित गन्ने के मूढ़ को उखाड़ कर जला दें अथवा गन्ने के खेत से दूर जाकर उन्हें नष्ट कर दें. उखाड़े गए स्थान पर 10 ग्राम ब्लीचिंग पाउडर डालकर मिट्टी से ढक दें।उन्होंने को 0238 गन्ने की बुवाई करते समय किसानो से दो आँख के टुकड़ो को फफूँदी नाशक हेक्सास्टॉफ के घोल में पूरी रात या कम से कम तीन चार घंटे डुबोकर ही बुवाई करने की सलाह दी। उन्होंने बसंत कालीन बुवाई में किसानों को गन्ना प्रजाति सीओ 0118 एवं गेहूं की कटाई के बाद सीओ 15023 प्रजाति की बुवाई करने के लिए भी प्रेरित किया।गोष्ठी के प्रारम्भ में प्रगतिशील किसान उपेन्द्र सिंह व मुकुल मिश्रा ने डॉ बक्शीराम को स्मृति चिन्ह व अंगवस्त्र देकर सम्मानित किया। इस अवसर पर गन्ना विभाग प्रमुख विवेक तिवारी, रीजनल हेड रमेश चौधरी, ज़ोनल इंचार्ज सत्येन्द्र मिश्र, सुदीप वर्मा, दिनेश वर्मा, रिंकपाल सिंह, अलोक सिंह सिंटू, वीरेंद्र यादव प्रधान, चंद्रशेखर, मुन्ना पाण्डेय, प्रशांत मिश्र सहित तमाम गन्ना किसान मौजूद रहे।

