मोहमदी खीरी। एक तरफ जहां खाद्य सामग्री के भाव सातवें आसमान को छू रहे हैं वहीं दूसरी तरफ उसमे मिलावट भी उतने ही बड़े पैमाने पर की जा रही है।लोगों को मोटे दाम चुकाने के बाद भी शुद्ध खाद्य पदार्थ नहीं मिल रही है।फिर चाहे कड़वा तेल हो या मसाले,या फिर दूध,खोया,पनीर और मिठाई।नतीजन जनमानस को शारीरिक स्वास्थ्य नुकसान के साथ-साथ आर्थिक नुकसान का भी सामना करना पड़ रहा है।ऐसा भी नही की इस मिलावटी खेल की जानकारी संबधित विभाग को नही।सबंधित विभाग को जानकारी भी है और समय-समय पर शोसल मीडिया इत्यादि से मिलावटी खाद्य पदार्थो की बिक्री रोकने की खबर चलती रही है।लेकिन मिलावटी खाद्य सामग्री को लेकर चलने वाले अभियान की मार हर वार छोटे व खोखा-पटरी दुकानदार को ही झेलनी पड़ती है।अब ऐसे में यदि कहा जाए कि मिलावट का पूरा खेल स्थानीय संबधित अधिकारी की मिलीभगत से चल रहा है तो कहना गलत ना होगा।तो अब ऐसे में मिलावटी कड़वे तेल,दूध,मसाले इत्यादि के बड़े माफियाओ पर लगाम कैसे लगे।*
सूत्रों अनुसार नगर से सटे ग्रामीण इलाकों में दुकानदारों द्वारा कम लागत में अधिक मुनाफा कमाने की होड़ के चलते सबसे ज्यादा मिलावटी खाद्य पदार्थो की बिक्री की जा रही है।अब ऐसे में दुकानदार की मुनाफाखोरी मिलावट युक्त खाद्य पदार्थ बाजार में बेचकर आम आदमी के स्वास्थ्य के साथ खिलवाड़ कर रहे हैं।जबकि डॉक्टरों का कहना है कि इन मिलावटी चीजें खाने से गंभीर बीमारियां होने की संभावना बनी रहती है।लेकिन खाद्य विभाग छूट पुट कार्यवाही को ही लंका दहन मान अपनी जिम्मेदारी पूरी कर लेते है।*
वही इन दिनों फल और सब्जी में भी तरह-तरह केमिकल का इस्तेमाल किया जा रहा है।एक सब्जी विक्रेता की माने तो केमिकल से सब्जी ताजी और हरी बनाए रखने के लिए केमिकल का प्रयोग किया जाता है।वहीं दूध में पानी मिलाना अब बहुत छोटी और आम बात है।लेकिन दूध का व्यापार करने वाले लोग केमिकल मिलाकर अधिक समय तक रोकने व अधिक मात्रा में मिलावटी दूध बना कर धररले से बिक्री कर रहे है।मिलावटखोर यूरिया,ग्लूकोज जैसे अन्य-अन्य केमिकलो की मिलावट से अपने काम को अंजाम दे रहे है।इसके अलावा दूध में निरमा,साबुन व पानी सहित अन्य केमिकल को मिलाकर दूध तैयार कर रहे हैं।

