उत्तर प्रदेश के पिहानी विकासखंड के बंदरहा निवासी महेंद्र पाल मित्रा ने दो बीघे खेत व दो करोड़ रुपए दान देकर गांव में ही विशाल बुद्ध विहार बनवा दिया। ग्रामीण अभियंत्रण सेवा मैं अवर अभियंता पर से सरकारी सेवा प्रारंभ करने के बाद महेंद्र पाल एई पद से रिटायर हुए हैं। वे इस विशालकाय बुद्ध विहार को समाज हित में भिच्छु संघ को दान दे देंगे।आलीशान बुद्ध विहार का नामकरण महेंद्र पाल मित्रा की मां कौशल्या के नाम पर किया गया है। इस बुद्ध विहार में आठ कमरे 25 बाई 8 के हैं। शौचालय ,भोजनालय, स्नाना गृह, बडा कैंपस है। 2 बीघा में बने बुद्ध विहार में बाबा भीमराव अंबेडकर की मूर्ति व भगवान बुद्ध की मूर्ति के साथ महेंद्र पाल मित्रा के पिता स्वर्गीय रामलाल की मूर्ति की भी स्थापना की गई है। इन्हीं मूर्तियों के साथ महेंद्र पाल मित्रा व उनकी पत्नी मंजु लता की भी मूर्ति लगाई गई है।
भांजी को भी 12 बीघे खेत दिया दान
महामाया कौशल्या बुद्ध विहार व 2 बीघे खेत दान कर देने के बाद में महेंद्र पाल मित्रा के पास गांव में 12 बीघे खेत शेष रह गया था। उसे अपनी भांजी अर्चना वर्मा व वाह दामाद उदय प्रताप को दान में दे दिया। गांव में बना घर भी अपने चचेरे भाई सुरेंद्र पाल को दान देकर एक मिसाल पेश की है।
महेंद्र पाल मित्रा व मंजू लता हैं निसंतान
महेंद्र पाल मित्रा व उनकी पत्नी मंजू लता के कोई संतान नहीं है। दोनों पति पत्नी का कहना है कि क्षेत्र के सारे बच्चे हमारे ही बच्चे हैं।
पति पत्नी की अंतिम इच्छा शरीर दान की
महेंद्र पाल मित्रा व उनकी पत्नी मंजू लता अंतिम इच्छा है कि वह अपना शरीर दान दे। इसके लिए वह मेडिकल कॉलेज में भी बात कर चुके हैं। आने वाले दिनों में शरीर दान की प्रक्रिया पूरा करेगे।
