कुछ पुलिसकर्मियों की गलत कार्यशैली अपराध बढ़ाती है, तो कुछ की संवेदनशीलता बदल देती है जिंदगी
समाज में पुलिस की भूमिका केवल कानून-व्यवस्था बनाए रखने तक सीमित नहीं है, बल्कि वह लोगों के जीवन और सोच पर भी गहरा प्रभाव डालती है। पुलिस का व्यवहार कई बार किसी व्यक्ति को अपराध की राह पर धकेल सकता है, वहीं कई बार पुलिस की संवेदनशीलता और नेक नीयत किसी भटके हुए व्यक्ति को समाज की मुख्यधारा में वापस ला सकती है।
विशेषज्ञों का मानना है कि यदि किसी निर्दोष व्यक्ति के साथ अन्यायपूर्ण व्यवहार किया जाए, उसकी बात सुने बिना उसे अपराधी की तरह देखा जाए या उसे अनावश्यक रूप से प्रताड़ित किया जाए, तो उसके मन में व्यवस्था के प्रति अविश्वास और आक्रोश पैदा हो सकता है। यही आक्रोश कभी-कभी उसे गलत रास्ते की ओर ले जाता है।
वहीं दूसरी ओर, कई ऐसे उदाहरण भी सामने आते हैं जहां पुलिसकर्मियों ने मानवता और संवेदनशीलता का परिचय देकर लोगों की जिंदगी बदल दी। नशे की लत में फंसे युवाओं को समझाकर नई दिशा देना, अपराध की दुनिया में कदम रखने वाले किशोरों को शिक्षा और रोजगार से जोड़ना, गरीब और असहाय लोगों की मदद करना तथा सामाजिक विवादों को संवाद के माध्यम से सुलझाना ऐसे कार्य हैं जो पुलिस की सकारात्मक छवि को मजबूत करते हैं।
सामाजिक चिंतकों का कहना है कि पुलिस की वर्दी केवल शक्ति का प्रतीक नहीं, बल्कि विश्वास और सेवा का भी प्रतीक है। जब पुलिस जनता के साथ सम्मानजनक व्यवहार करती है, तो लोगों का कानून पर भरोसा बढ़ता है और अपराध स्वतः कम होने लगते हैं।
आज आवश्यकता इस बात की है कि पुलिस विभाग में जवाबदेही के साथ-साथ मानवीय दृष्टिकोण को भी बढ़ावा दिया जाए। क्योंकि एक पुलिसकर्मी की छोटी-सी सकारात्मक पहल किसी परिवार की जिंदगी संवार सकती है, जबकि एक गलत व्यवहार किसी व्यक्ति को समाज और कानून से दूर कर सकता है।

