मितौली खीरी । कस्ता मितौली पटेल सेवा संस्थान ने उच्च शिक्षण संस्थानों में समानता, समावेशी वातावरण और शैक्षणिक गुणवत्ता को सुनिश्चित करने की दिशा में विश्वविद्यालय अनुदान आयोग (यूजीसी) द्वारा लाए गए नए बिल का पुरजोर समर्थन किया है। संस्थान का मानना है कि यह विधेयक शिक्षा जगत में सकारात्मक बदलाव लाने में अहम भूमिका निभाएगा। इस संबंध में संस्थान के एक प्रतिनिधिमंडल ने एसडीएम मधुसूदन गुप्ता से मुलाकात कर माननीय मुख्य न्यायाधीश को संबोधित एक ज्ञापन सौंपा।
जातिगत भेदभाव मिटाने की पहल का स्वागत
संस्थान द्वारा सौंपे गए ज्ञापन में यूजीसी बिल को समय की मांग बताया गया है। संस्थान के पदाधिकारियों ने कहा कि उच्च शिक्षण संस्थानों में अक्सर जातिगत भेदभाव और असमानता की शिकायतें सामने आती रही हैं। यह बिल न केवल ऐसे भेदभाव को रोकने में कारगर सिद्ध होगा, बल्कि समाज के सभी वर्गों, विशेषकर वंचित और पिछड़े तबकों के छात्रों के लिए समान अवसर सुनिश्चित करने में मील का पत्थर साबित होगा।
सामाजिक न्याय और शिक्षा की गुणवत्ता पर जोर
ज्ञापन में मांग की गई है कि उच्च शिक्षा के गिरते स्तर को संभालने और सामाजिक न्याय की अवधारणा को मजबूत करने के लिए इस बिल के प्रावधानों को सख्ती से लागू रखा जाए। संस्थान के सदस्यों ने जोर देकर कहा कि जब तक शिक्षण संस्थानों में भयमुक्त और समावेशी माहौल नहीं होगा, तब तक देश की युवा प्रतिभाएं अपना सर्वश्रेष्ठ प्रदर्शन नहीं कर पाएंगी।
प्रतिनिधिमंडल में ये रहे शामिल
इस मौके पर संस्थान के अध्यक्ष सत्य पाल पटेल ने नेतृत्व किया। उनके साथ प्रतिनिधिमंडल में अभय वर्मा, आशीष कुमार वर्मा, उमेश वर्मा, वेद प्रकाश, सचिन सिंह नितिन, रितेश कुमार, अमित कुमार, बृजेश कुमार और अंकुल कुमार सहित कई अन्य सक्रिय सदस्य मौजूद रहे। सभी ने एक स्वर में बिल के समर्थन में अपनी आवाज बुलंद की।

