जी हा आप ठीक सुन रहे है आज कल के दौर मे सच्ची पत्रकारिता करना किसी जोखिम से कम नहीं है। क्योंकि अगर आप सच लिखने की हिम्मत रखते है,तो सबसे पहले आप अपनी सुरक्षा का भी ध्यान दे। आज कल जहाँ देखो वहा पत्रकारों को निशाना बनाया जा रहा है। चाहे वह पुलिस विभाग हो, स्वास्थ्य विभाग हो, राजस्व विभाग हो कोई भी विभाग हो हर जगह पत्रकार को दबाने का काम किया जाता है। पत्रकार कहने को तो देश का चौथा स्तम्भ है लेकिन यह कुर्सी पर बैठे कुर्सी धारी भूल जाते है। और पत्रकारों को मुकदमे और जेल जैसी धमकी देने लगते है।
और यही हाल आज कल माफियाओं के भी है चाहे खनन माफिया हो, कटान माफिया हो, इनकी आँखों मे भी पत्रकारों के प्रति एक अलग ही नफ़रत देखने को मिलेगी। अगर आपने ने किसी खनन माफिया या कटान माफिया कि खबर छापी है तो उस पर कार्यवाही भले ना हो लेकिन आप उसी समय से उस माफिया की निगाहो मे आ जायेंगें और वो हर वह मौका तलासेगा जहाँ से आपको कमजोर किया जा सके, गिराया जा सके ऐसा ही सीतापुर के एक प्रतिष्ठित अख़बार के पत्रकार के साथ हुआ जो महोली से सीतापुर जा रहे थे तभी अचानक अज्ञात लोगो ने आकर पत्रकार राघबेंन्द्र बाजपेयी कि हत्या कर दी।
उस पत्रकार की क्या गलती थी वह सच को सच लिखता था झूठ का डट कर सामना करता था या फिर जिनके द्वारा यह कृत्य किया गया उनका कोई बड़ा राज था पत्रकार के पास। दिन मे खुलेआम आखिर हत्या का क्या कारण हो सकता है अपने आप मे एक बड़ा सबाल….
दुनिया के भ्रस्टाचार को उजागर करने बाले पत्रकारो पर हो रहे अत्याचार की कौन सुनेगा पत्रकार कहां फरियाद लेकर जाये किसे सुनाये अपने दिल कि बात सरकारी कुर्सीयों पर बैठे कर्मचारी भी पत्रकारों की सुनने मे समय लगाते है। पत्रकारों को अक्सर अपने हालातो से स्वयं लड़ना पड़ता है उनकी सुनने बाला कोई नहीं होता…..

