पंकज कुमार (मुख्य संपादक)
मितौली खीरी। विकास खण्ड मितौली क्षेत्र की ग्राम पंचायत ग्रंट इनायत चीफ के गांव हैदर नगर गांव में तेज आंधी के चलते अधूरा नवीन आवास धराशाही हो गया।
जहाँ क्षेत्रीय पत्रकार इस घटना को कवरेज करने गया। तो बयान लेते समय आवास लाभार्थी से आवास के नाम पर की गई जमकर अवैध वसूली का पर्दाफाश हुआ। जहां आवास लाभार्थीनी सरला देवी पत्नी राजाराम ने आन कैमरा बताया कि विकलांग का आवास आया था।जिस पर ग्राम प्रधान फूलमती के भाई बाबूराम प्रधान प्रतिनिधि ने कहा था कि अगर ₹30000 नहीं दोगे तो आपको आवास नहीं दिया जाएगा।जब आवास आ गया तो पहले किस्त में ₹20000 लिए और दूसरी किस्त में ₹10000 लिए हैं। विकलांग लोगों के आये आवास लाभार्थियों से 30000 रुपए लेने का लोगों नें आरोप लगाया हैं। इसका पर्दाफाश जब हुआ। जब सरला देवी पत्नी राजाराम के घर के लोगों नें क्षेत्रीय पत्रकार को सूचना दी। आये आवास के संबंध में पूछने लगे तो पीड़ित परिजनों ने बताया कि ₹30000 प्रधाननिधि बाबूराम ने ले लिया। जब इस घटना के संबंध में पूरी जानकारी करना शुरू किया तो सभी विकलांग लाभार्थियों ने आवास दिलाने के नाम पर प्रति आवास 30000 रुपए ले लिये जाने के गंभीर आरोप कैमरा पर लगाए हैं।
इस संबंध में फोन वार्ता के माध्यम से पत्रकार ने जब जानकारी लेना चाहा तोप्रधान प्रतिनिधि बाबूराम ने इधर-उधर की बातो मे टालते हुए पत्रकार को ही उल्टा फर्जी मुकदमा में फसाने की धमकी दे डाली। कहा तुमको हम छोड़ेंगे नहीं चाहे कुछ करना पड़े। यदि पंचायत में जांच हो जाए तो इनके खिलाफ कई सबूत खुलकर आयेंगे सामने। इतना हीं आवास के नाम पर ढाई ढाई हजार रुपए वसूली किये जाने के मामले कापर्दाफाश होना होगा तय। गौरतलब हो कि ऐसे कई परिवार है जो गरीबी मजदूरी कर अपने परिवार का भरण पोषण करते हैं। उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री श्री योगी आदित्यनाथ लगातार ऐसे प्रधानो पर कार्रवाई करने के आदेश दे रहे हैं जो लाभार्थियों से आवास के नाम पर वसूली करके अपनी तिजोरियां भरने में लगेहैं। अब देखना यह है क्या यहां कार्यवाही की जाएगी या इसी तरह से टालमटोल कर मामले में लीपापोती कर दी जायेगी ।इतना ही नहीं जिनके आवास अभी बने नहीं है उनसे पहले ही ढाई ढाई हजार रुपए आवास के नाम परवतौर टोकन मनी वसूली की गई।
ज़ब इस संबंध में खंड विकास अधिकारी मितौली को फोन के माध्यम से अवगत कराया गया है। तों उन्होंने कहा है कि इस प्रकार की कोई बात सामने आई तो प्रधान प्रतिनिधि पर कार्रवाई की जाएगी।
वही जब ग्राम पंचायत सचिव योगेन्द्र वर्मा से उनका पक्ष जानने का प्रयास किया गया तो उन्होंने फोन उठाना ही उचित नहीं समझा जिससे उनके पक्ष की जानकारी नहीं हो सकी।

