जरूरतमंद के प्रति करुणा दया ही ईश्वर के प्रति हमारा कर्तव्यकहते हैं कि मानव की प्रतिष्ठा में ही धर्म की प्रतिष्ठा है कोई भी धर्म श्रेष्ठ और महान हो सकता है लेकिन मानवता से बड़ा कोई धर्म नहीं हो सकता! प्यासे को पानी पिलाना भूखे को खाना खिलाना और जरूरतमंद की जरूरत को पूरा करना ही सबसे बड़ी मन होता है अब ठंड शुरू हो चुकी है गरीब व बेसहारा लोग सड़कों पर अपना जीवन जी रहे हैं उनके लिए भी सामाजिक संस्था व प्रशासन को आगे आकर इस ठंड से बचाया जाए!सर्दी की रातें गरीबों के लिए बहुत भारी पड़ती हैं उन्हें तलाश रहती है किसी ऐसे मसीहा की जो आकर उनको ठंड से बचा सके! ठिठुरते हुई रात न गुजारनी पड़े! बहुत से गरीब इन सर्दी की रातों में खुले आसमान के नीचे कांपते रहते हैं हालांकि ऐसे कई लोग हैं जो गरीबों की पीड़ा को समझते हुए नेक कार्य के लिए आगे आते रहते हैं और गर्म कपड़े कंबल आदि का वितरण कर लोगों को मानव सेवा के लिए प्रेरित करते हैं गरीबों के लिए सर्दी का मौसम काफी कष्टप्रद रहता है गर्मी में तो काम चल जाता है कहीं भी पड़े रहो इतनी दिक्कत नहीं होती लेकिन सर्दी में उनके लिए भारी मुसीबत होती है!जब कड़ाके की ठंड में बिना कपड़ों के उनको रातें गुजारनी पड़ती हैं ठिठुरते हुए वह रात किसी तरह से रात व्यतीत करते हैं हालांकि दिन में भी उनको परेशानी होती है लेकिन धूप निकलने पर कुछ राहत मिल जाती है इस स्थिति में गरीब लोग किसी ऐसे मसीहा की राह देखते हैं जो उनको गर्म कपड़े और कंबल आदि का वितरण करे!समाज में कई लोग ऐसे हैं जो गरीबों की पीड़ा को समझते हैं और उनकी मदद के लिए आगे भी आते हैं! ठंड से परेशान लोग अपने शरीर में गर्माहट लाने के लिए कई तरह के उपाय कर रहे हैं विशेष तौर पर गरीब परिवार के लोगों को काफी मुश्किलों का सामना करना पड़ता हैं हालांकि प्रशासन के द्वारा अभी तक कहीं भी अलाव की व्यवस्था नहीं की गयी है और ना ही कहीं गरीबों के बीच कंबल वितरण किया जा रहा है! गरीब बेसाहय मजदूर वर्ग के लोग विशेष रूप से ठंड से परेशान हो जाता हैं कपड़े व अन्य आवश्यक संसाधनों के अभाव में उन्हें जाड़े का यह मौसम गुजारना काफी कठिन साबित होता है ठंड के मौसम में गरीबों मजदूरों बेसहारों को मात्र अलाव का सहारा ही होता है जिसके सहारे वे किसी प्रकार रात गुजार लेते हैं!ऐसे में सामाजिक संस्थानों व प्रशासन को इस और ध्यान देना चाहिए और जल्द से जल्द ही चौक-चौराहों एव गरीब मजदूर बेसहारों की बस्तियों में अलाव की व्यवस्था करने तथा गरीब व सड़क पर पढ़े मजबूर लोगो के बीच गर्म कपड़े व कंबल का वितरण प्रारंभ करें!इसीलिए कहते हैं कि जरूरतमंद की समय पर मदद करना ही सबसे बड़ा मानव धर्म है! मानवता से बड़ा कोई भी जीवन में धर्म नहीं होता है! जरूरतमंद के प्रति करुणा दया ही ईश्वर के प्रति हमारा कर्तव्य है।
मितौली खीरी। सात दिवसीय श्री लक्ष्मी नारायण महायज्ञ एवं मानस संत सम्मेलन का आयोजन ग्राम कानाखेड़ा तुरंत नाथ धाम प्रांगण पूर्णाहुति के साथ संपन्न हुआ सप्तम दिवस रात्रि बेलाकाल में राष्ट्रीय प्रहरी पवनेश जी महाराज ने संगीतमय सुदामा प्रसंग की कथा सुनाई। सुदामा चरित्र के माध्यम से भक्तों के सामने दोस्ती की मिसाल पेश की और समाज में समानता का संदेश दिया। श्री कृष्ण और सुदामा जैसी मित्रता आज के युग में कहीं नहीं है। एक बार की बात श्रीकृष्ण और सुदामा संदीपन के आश्रम में शिक्षा ग्रहण कर रहे थे। उसी समय माता ने दोनों मित्रों से खाना बनाने के लिए जंगल से कुछ लकड़ी लाने को कहा। दोनों मित्र जंगल से लकड़ी लेने जा रहे थे। तभी जंगल में अचानक बरसात होने लगी। भूख लगने पर माता ने सुदामा के लिए कुछ चने दिये थे और कहा जब भी भूख लगे दोनों एक साथ खा ले।लेकिन वो चने श्रापित थे इसलिए माता के दिये हुए चने को सुदामा जी अकेले ही खा गये। हरे राम
सुदामा गरीब थे लेकिन दरिद्र नहीं
सुदामा जी के पास कृष्ण नाम का धन था। संसार की दृष्टि में सुदामा गरीब तो थे लेकिन दरिद्र नहीं थे। अपने जीवन में किसी से कुछ मांगा नहीं। पत्नी सुशीला के बार-बार कहने पर सुदामा अपने मित्र कृष्ण से मिलने गए।जब वह महल के गेट पर पहुंच जाते हैं, तब प्रहरियों से कृष्ण को अपना मित्र बताते है और अंदर जाने की बात कहते हैं। सुदामा की यह बात सुनकर प्रहरी उपहास उड़ाते हैं। कहते है कि भगवान श्रीकृष्ण का मित्र एक दरिद्र व्यक्ति कैसे हो सकता है। प्रहरियों की बात सुनकर सुदामा अपने मित्र से बिना मिले ही लौटने लगते हैं। इसी समय एक प्रहरी महल के अंदर जाकर भगवान श्रीकृष्ण को बताता है कि महल के द्वार पर एक सुदामा नाम का दरिद्र व्यक्ति खड़ा है और अपने आप को आपका मित्र बता रहा है। द्वारपाल की बात सुनकर भगवान कृष्ण नंगे पांव ही दौड़े चले आते हैं। मानस मर्ममज्ञ वक्ता पंडित आदित्य अवस्थी महारथी हरदोई, पंडित मिथिलेश शुक्ल ,गोविंद जी महाराज नैमिष धाम, सुनील शास्त्री चंचल जी, सीडी कैसेट गायक यज्ञ कथा व्यास पंडित हरे राम शुक्ला पंडित मृदुल नंद जी महाराज नैमिष धाम की अमृत मई वाणी द्वारा संगीतमय भगवत कथा सुनाई।कन्या भोज विशाल भंडारे के साथ यज्ञ पूर्णाहुति हुई । यज्ञ आचार्य पंडित अनूप शुक्ला नैमिष धाम, पंडित राहुल शुक्ला, पंडित श्यामजी शुक्ल, वैदिक मण्डल द्वारा वैदिक मंत्रोच्चारण हवन पूजन अर्चन के साथ यज्ञ की पूर्णाहुति हुई। यज्ञ मुख्य आयोजक रुपेश मिश्र, मनमोहन दीक्षित, रामजी बाजपेई, रजनीश, अनुज, घनश्याम, ललित नारायण, भूपेश मिश्र, सुनील मिश्र, जिला पंचायत सदस्य सुरेश पुष्कर, विपिन भट्ट, जीतू गुप्ता, मुदित दीक्षित सहित काफी संख्या में माताए बहने भक्तगण मौजूद रहे।

