कस्ता खीरी । गुड़ खाने में जितना स्वादिष्ट होता है उससे कहीं अधिक मन मोहने वाली इसकी खुशबू होती है। क्षेत्र में कोल्हू चल गए हैं और यहां गुड़, राब बनने का काम शुरु हो चुका है। ऐसे में इसकी खुशबू फैलने लगी है। चीनी मिल चलाने को लेकर अपनी तैयारी में जुटे हुए है ऐसे में किसान भी अपने घरेलू खर्च पूरे करने को इन पर गन्ना डाल रहे हैं। क्षेत्र के गोला कस्ता हाइवे पर टिकोला,बरूई, भोपतपुर, गुलौला,मदारपुर,बेहजम एरिया में कई दर्जन भर से ज्यादा गन्ना कोल्हुओं का हर वर्ष संचालन होता है। इस बार भी कच्चे मीठे के व्यापारियों ने कोल्हू लगाकर गुड़, राब आदि बनाना शुरू कर दिया है।
*चीनी मिल देर से चलने से कम दाम पर गन्ना बेचने की मजबूरी*
वैसे तो देवोत्थान एकादशी पर गन्ने से देवताओं की पूजा अर्चना करने के बाद गन्ना खाने व रस पीने आदि का चलन है, लेकिन क्षेत्र में ईख की पैदावार अधिक होने और कारोबारी मजबूरी के चलते देवोत्थान से पूर्व ही गन्ना कोल्हू शुरू हो जाते हैं। हालांकि देरी से चीनी मिलों के चलने के बावजूद गन्ना कोल्हुओं पर तेजी से गन्ने की खरीद हो रही है। कोल्हू संचालक भी चीनी मिल न चलने का फायदा उठाते हुए 230 से 250 रुपये प्रति क्विंटल के भाव से गन्ने की खरीद कर रहे हैं, जबकि मिल द्वारा 325 रुपये प्रति क्विंटल की दर से खरीद की जाएगी। छोटे किसान घरेलू खर्च और पशुओं के लिए चारा बरसीम आदि की बुवाई करने के लिए खेत खाली करने की खातिर औने पौने दामों पर गन्ना बेचने को मजबूर हैं।
