मैगलगंज खीरी।सावन माह में अपनी अलग पहचान रखने वाला त्योहार हरियाली तीज को कस्बे में धूमधाम से मनाया गया। इस त्योहार पर हरा रंग, हरी चूड़ियां, व मेहंदी का विशेष महत्व है।चूड़ियों की दुकान पर महिलाएं हरी चूड़ियां पहनते देखी गयीं। हरियाली तीज पर कुंवारी कन्याओं ने भी उपवास रखा।
व्रती महिलाओं ने बताया कि सावन का महीना प्रेम और उत्साह का महीना माना जाता है। प्रेम के धागे को मजबूत करने के लिए इस महीने में कई त्योहार मनाये जाते हैं। इन्हीं में से एक त्योहार है- ‘हरियाली तीज’। यह त्योहार हर साल श्रावण माह में शुक्ल पक्ष की तृतीया को मनाया जाता है। इस त्योहार के विषय में मान्यता है कि माता पार्वती ने भगवान शिव को पाने के लिए तपस्या की थी।
इससे प्रसन्न होकर शिव ने ‘हरियाली तीज’ के दिन ही पार्वती को पत्नी के रूप में स्वीकार किया था। इस त्योहार के विषय में यह मान्यता भी है कि इससे सुहाग की उम्र लंबी होती है।
हरियाली तीज से एक दिन पहले द्वितीया का श्रृंगार दिवस के रूप में मनाया जाता है, जिसे सिंजारा कहते हैं। बहू बेटियों को 9-9 प्रकार के मिष्ठान व पकवान बनाकर खिलाए जाते हैं। सिंघारा वाले दिन किशोरी एवं नव विवाहिता वधुएं इस पर्व को मनाने के लिए अपने हाथों और पावों में कलात्मक ढंग से मेहंदी लगाती हैं।
तीज के दिन स्त्रियां सोलह श्रृंगार करती हैं, जिनमें हरी साड़ी और हरी चूड़ियों का विशेष महत्व है. दिन-भर स्त्रियां तीज के गीत गाती हैं और नाचती हैं. हरियाली तीज पर झूला झूलने का भी विधान हैं. स्त्रियां अपनी सहेलियों के साथ झूला झूलती हैं
इस त्योहार पर कुंवारी कन्याओं को व्रत रखने से मनचाहा जीवनसाथी मिलता है।इस व्रत के करने की स्थानीय स्तर के अनुसार अलग अलग परंपराये हैं।
