मितौली-खीरी। विकासखंड मितौली की ग्राम पंचायत दरी नगरा में इंटरलॉकिंग निर्माण समेत विभिन्न विकास कार्यों में कथित अनियमितताओं को लेकर ग्रामीणों का आक्रोश सामने आया है। सोमवार को ग्रामीणों ने विकास कार्यों की जांच और सरकारी धन के खर्च का विवरण सार्वजनिक करने की मांग को लेकर धरना-प्रदर्शन शुरू कर दिया। मानवाधिकार संघ के पदाधिकारी एवं पत्रकार बाबा सिकंदर शाह ने सोमवार सुबह गांव में कीचड़ के बीच लेटकर विरोध प्रदर्शन शुरू किया। उन्होंने आरोप लगाया कि कई विकास कार्यों को कागजों पर पूरा दिखाकर भुगतान करा लिया गया, जबकि मौके पर उनकी स्थिति अलग है। ग्रामीणों ने इंटरलॉकिंग,रीबोर तथा अन्य कार्यों की जांच कराने की मांग उठाई। धरनास्थल पर तिरंगा लगाकर ग्रामीणों ने प्रदर्शन किया। देखते ही देखते बड़ी संख्या में ग्रामीण धरने के समर्थन में पहुंच गए। ग्रामीणों का कहना था कि गांव में जलभराव और कीचड़ के कारण बच्चों को विद्यालय आने-जाने में परेशानी होती है। ग्रामीणों ने आरोप लगाया कि जल जीवन मिशन के तहत सड़कों को तोड़ा गया, लेकिन कई स्थानों पर लोगों के घरों तक पानी नहीं पहुंच सका। मामले की जानकारी मिलने पर मितौली थाना प्रभारी महेश पाठक पुलिस बल के साथ मौके पर पहुंचे और प्रदर्शनकारियों को समझाने का प्रयास किया। इसके बाद मितौली तहसीलदार प्रीति सिंह भी धरनास्थल पर पहुंचीं। करीब एक घंटे तक उन्होंने ग्रामीणों से वार्ता कर मामले को शांत कराने का प्रयास किया, लेकिन ग्रामीण अपनी मांगों पर अड़े रहे। ग्रामीणों ने अधिकारियों के सामने ग्राम पंचायत में कराए गए कार्यों की जांच, सरकारी धन के खर्च का विवरण और कथित अनियमितताओं की जिम्मेदारी तय करने की मांग रखी। ग्रामीणों ने कहा कि पूर्व में भी शिकायतें दी गई हैं। यदि लिखित मांगपत्र के आधार पर जांच और कार्रवाई नहीं हुई तो पांच दिन बाद बड़े स्तर पर धरना-प्रदर्शन किया जाएगा।
धरने के दौरान ग्रामीणों में ग्राम प्रधान और सचिव के खिलाफ भी नाराजगी दिखाई दी। भीड़ में उनके खिलाफ नारेबाजी हुई तथा मामले की निष्पक्ष जांच और दोषी पाए जाने पर कार्रवाई की मांग उठाई गई।
वहीं ग्रामीणों का आरोप है कि ग्राम पंचायत सचिव ब्रह्म प्रकाश तिवारी लंबे समय बाद गांव में पहुंचे। इसको लेकर भी ग्रामीणों में नाराजगी देखने को मिली। कुछ ग्रामीणों ने यह भी आरोप लगाया कि पूर्व में शिकायत करने पर उन्हें दबाव में लेकर शिकायतों पर रिपोर्ट लगवा दी गई और मामले का उचित समाधान नहीं हुआ।
ग्रामीणों ने मांग की है कि ग्राम पंचायत में पिछले वर्षों के दौरान कराए गए सभी विकास कार्यों, उनके स्वीकृत बजट, भुगतान और मौके पर हुए निर्माण की तकनीकी जांच कराई जाए। साथ ही यदि जांच में सरकारी धन के दुरुपयोग या अनियमितता की पुष्टि होती है तो संबंधित जिम्मेदारों के खिलाफ नियमानुसार कार्रवाई की जाए।
अब पूरे मामले में प्रशासन द्वारा जांच कराए जाने और ग्रामीणों की शिकायत पर क्या कार्रवाई की जाती है, इस पर सभी की निगाहें टिकी हैं। हालांकि ग्रामीणों द्वारा लगाए गए आरोपों की स्वतंत्र रूप से पुष्टि होना अभी बाकी है।

