रिपोर्ट पंकज कुमार गौतम
आज के दौर में पत्रकारिता करना अपने आप में बहुत बड़ी चुनौती है, अगर आप ईमानदारी से नि स्वार्थ पत्रकारिता करना चाहते हैं तो आपको एक बार सोचना पड़ेगा। क्योंकि इस दौर में एक पत्रकार ही दूसरे पत्रकार को हर जगह नीचा दिखाने में कोई कसर नहीं छोड़ता है।एक पत्रकार जब किसी विभाग के किसी भी अधिकारी के पास बैठा हो अगर वहां पर किसी दूसरे पत्रकार की बात चली तो दूसरे पत्रकार में लाख बुराइयां निकालने वाला एक पत्रकार ही होता है अपने आप को ईमानदार साबित करने में और दूसरे पत्रकार को दलाल साबित करने में एक पत्रकार कोई कसर नहीं छोड़ता है यही वजह हैं कि आज इस दौर में भ्रष्टाचारियों बेईमानों के तलवे चाटने वाले कुछ पत्तलकार एक ईमानदार पत्रकार के लिए बहुत बड़ा खतरा है।
जिस तरह से जनपद सीतापुर की तहसील महोली के रहने वाले पत्रकार साथी राघवेंद्र बाजपेई की दिन दहाड़े हत्या एक पत्रकार कि नहीं बल्कि हर एक पत्रकार के क़लम पर हमला है और लोकतंत्र कि हत्या है सीतापुर के पत्रकार लगन के साथ खाद्यान्न घोटाले की खबर पर काम कर रहे थे कहीं ना कहीं भ्रष्टाचारियों को खतरा महसूस हुआ जिस तरह से दिन दहाड़े पत्रकार साथी राघवेंद्र बाजपेई की हत्या कर दी गई वह अपने आप में बहुत ही शर्मनाक है। मुझे किसान थार घटना भी याद है कि जब एक पत्रकार की मौत हुई थी पूरे भारत में जिसकी हलचल हुई विपक्ष ने आवाज़ बुलंद की तो उसके परिवार को जिंदगी गुजारने का सहारा हो सका। इस लिए मेरे पत्रकार साथियों इन घटनाओं से सबको सबक लेना चाहिए कि हम अपने आप को सुपीरियर साबित करने के चक्कर में किसी दूसरे को बुरा साबित करने में लगे हैं।अब भी वक्त संभल जाना चाहिए वरना जो आप दूसरे के लिए करते है कल कोई आप के साथ भी ऐसा करेगा। मिल जुल कर रहने में भलाई है एकता में मजबूती है।
अपील=उत्तर प्रदेश सरकार से अपील करता हूं जो लोग इस हत्याकांड में शामिल है उनको कड़ी से कड़ी सजा दी जाए ताकि अपने आप में एक नजीर बन सके

