पंकज कुमार( मुख्य संपादक)
मितौली खीरी। केंद्रीय महिला एवं बाल विकास मंत्रालय द्वारा प्रारंभिक बाल्यावस्था देखभाल (ईसीसीई) के बेहतर संचालन हेतु मिशन सक्षम आंगनवाड़ी और पोषण 2.0 के जरिए नई शिक्षा नीति के अनुसार एक नवाचार प्रयोग में लाया गया है जिसका उद्देश्य देश की भावी पीढ़ी को सशक्त एवं शिक्षित बनाना है। “पोषण भी पढ़ाई भी “कार्यक्रम के अंतर्गत देश भर में संचालित आंगनबाड़ी केंद्र जो वर्तमान में ग्रामीण बाल विकास एवं देखभाल केंद्र के रूप में संचालित हो रहे हैं,और आंगनवाड़ी कार्यकर्ता जिनकी भूमिका सिर्फ पोषाहार वितरण एवं जन समुदाय में सामान्य भागीदारी तक सीमित थी को परिवर्तित करते हुए व्यापक बदलाव की सफल शुरुआत की जा चुकी है। “पोषण भी पढ़ाई भी “कार्यक्रम के माध्यम से आंगनवाड़ी कार्यकर्ता को प्रशिक्षित करने के उपरांत को प्राथमिक विद्यालय में संचालित आंगनबाड़ी केंद्र को प्री- स्कूल के रूप में विकसित करना इन केन्द्रों में 3 से 6 वर्ष आयु वर्ग के बच्चों के लिए शालापूर्व शैक्षिक गतिविधियों का आयोजन करना, स्वदेशी मूल के खेल खिलौने को शैक्षिक सामग्री के रूप में प्रयोग में लाना, मातृभाषा के माध्यम से अनौपचारिक शिक्षा को प्रोत्साहन देना जैसे बदलाव शामिल हैं वहीं दूसरी ओर आंगनबाड़ी कार्यकर्ताओं को सामुदायिक सहभागिता में सक्रिय भागीदारी करते हुए स्वास्थ्य एवं पोषण आधारित शिक्षा प्रदान करना माताओं को स्तनपान, नवजात शिशु और युवा आहार की प्रथाओं में परामर्श देना जैसे बदलाव भी शामिल हैं।
वास्तव में इन प्रावधानों का मूल उद्देश्य कुपोषण को रोकना एवं शाला पूर्व शिक्षा के अंतर्गत बालक के समग्र विकास में आंगनबाड़ी की भूमिका को विस्तृत रूप प्रदान करना है। अधिकांश आंगनबाड़ी केंद्र में स्तनपान करने वाली माताओं के लिए पोषक आहार एवं नामांकित बच्चों के लिए गर्म पका हुआ भोजन प्रदान किया जा रहा है जिसके फलस्वरूप हमारे आंगनबाड़ी केंद्र पोषक आहार के वितरण केंद्र के रूप में भी संचालित हो रहे हैं।
यदि वर्तमान स्थिति में सामान्य आंकड़ों की बात की जाए तो लगभग 14 लाख आंगनबाड़ी केंद्र संपूर्ण देश में संचालित हो रहे हैं, जिसमें 3 से 6 वर्ष आयु वर्ग के लगभग 9 करोड़ लाभार्थी बच्चों को पोषक आहार एवं शालापूर्व शिक्षा प्रदान की जा रही है किंतु बुनियादी सुविधाओं के अभाव में इन पर ठीक से क्रियान्वयन नहीं हो पा रहा है। अनेक आंगनबाड़ी केंद्रों में बच्चों के बैठने की उचित व्यवस्था नहीं है एवं कुछ आंगनबाड़ी केंद्र खुले आसमान के नीचे भी संचालित होते पाए जाते हैं। बुनियादी सुविधाओं के अभाव में किसी भी कार्यक्रम का सफल होना संदेह जनक होता है।
इन परिस्थितियों को ध्यान में रखते हुए आंगनबाड़ी कार्यकर्ताओं को खेल एवं गतिविधि आधारित शिक्षा के साथ-साथ डिजिटल एजुकेशन से संबंधित प्रशिक्षण निरंतर प्रदान किया जा रहा है। स्टाफ की कमी को पूरा करने के लिए आंगनबाड़ी कार्यकर्ताओं एवं सहायिकाओं की नियुक्ति की प्रक्रिया भी संचालित हो रही है। ग्रामीण स्तर पर प्रत्येक ब्लॉक में निश्चित संख्या में आंगनबाड़ी केंद्रों को लर्निंग लैब के रूप में परिवर्तित करते हुए प्री -स्कूल के रूप में स्थापित किया जाने का निरंतर प्रयास किया जा रहा है,क्योंकि आंगनबाड़ी केंद्र ही शालापूर्व शिक्षा के मूल आधार हैं, और मनोवैज्ञानिक रूप से कहा जाता है कि मस्तिष्क का 85 से 90% विकास प्रारंभ की 6 वर्ष तक की आयु में होता है इस तथ्य को ध्यान में रखते हुए खेल एवं गतिविधि आधारित शिक्षा को निरंतर प्रोत्साहित किया जा रहा है, नई शिक्षा नीति में प्रोजेक्ट बेस्ड लर्निंग एवं अनौपचारिक शिक्षा को प्रोत्साहन देना शालापूर्व शिक्षा को सफल बनाने का प्रयास है। देश की भावी पीढ़ी की नींव को मजबूत करने सामुदायिक गतिविधियों में सक्रिय भागीदारी करने तथा “पोषण भी पढ़ाई भी “कार्यक्रम को सफल बनाने के लिए इसको जन आंदोलन के रूप में संचालित किया जाना अति अनिवार्य है,जिसमें समस्त विभागों का सक्रिय योगदान भी जरूरी है।

