पंकज कुमार (मुख्य संपादक )
लखीमपुर खीरी।धौरहरा लोकसभा मे बसपा द्वारा ब्राह्मण चेहरे पर दांव लगाने के बाद धौरहरा सीट सबसे ज्यादा चर्चा में है हालांकि श्याम किशोर अवस्थी भारतीय जनता पार्टी में कई जिम्मेदार पदों पर भी रहे हैं इसलिए भाजपा के हर वर्ग के वोट मे जबरदस्त सेंधमारी भी करते नजर आ रहे हैं धौरहरा लोकसभा में ब्राह्मण लगभग साढ़े तीन लाख के आसपास है जैसा की जानकार बताते हैं उत्तर प्रदेश और बिहार मे जाति आधारित चुनाव होते हैं बसपा का कोर वोटर और ब्राह्मण मिला कर संख्या लगभग सात लाख के आसपास होती है तो वहीं दूसरी तरफ बीते दो लोकसभा चुनाव में बसपा दो नंबर की पार्टी रही है जबकि दोनों बार बाहरी प्रत्याशी था वही श्याम किशोर अवस्थी को क्षेत्रीय प्रत्याशी होने का भी लाभ मिल रहा है ब्राह्मणों के अनदेखी और कार्यकर्ताओं से दूरी वर्तमान सांसद के लिए मुश्किल पैदा करती नजर आ रही है
गठबंधन प्रत्याशी आनंद भदौरिया भी दिखा रहे दम
समाजवादी पार्टी के आनंद भदौरिया गठबंधन के प्रत्याशी हैं हालांकि कांग्रेस का धौरहरा में कोई ग्राफ नहीं है आनंद भदौरिया सिर्फ अपनी पार्टी के दम पर चुनाव में है इससे पहले दो हजार चौदह में भी आनंद भदौरिया समाजवादी पार्टी से प्रत्याशी रह चुके हैं उस समय उत्तर प्रदेश में समाजवादी पार्टी की सरकार थी आनंद भदौरिया पूरे ताम झाम के साथ चुनाव मैदान में उतरे थे और पूरी लोकसभा में पैदल यात्रा भी की थी मुस्लिम समाज का एक तरफा वोट आनंद भदौरिया को गया था लेकिन जितना तो दूर दूसरे नंबर की पार्टी भी नहीं बन पाए थे उसके बाद आनंद भदौरिया ने धौरहरा से दूरी बना ली हालांकि 2019 में दिखाई पड़े लेकिन टिकट न मिलने के कारण फिर गायब हो गए इस बार आनंद भदौरिया क्षत्रिय वोटो को अपने पक्ष में करने में कामयाब होते नजर आ रहे हैं लेकिन मुस्लिम वोट अभी समाजवादी पार्टी के साथ खुलकर नहीं नजर आ रहा है शायद इसका कारण बसपा प्रत्याशी की लोकप्रियता है और लगातार बसपा द्वारा भाजपा को चुनौती देना है
भाजपा प्रत्याशी रेखा वर्मा तीसरी बार चुनाव मैदान में
भारतीय जनता पार्टी ने तीसरी बार रेखा वर्मा को चुनाव मैदान में उतारा है बीते दस सालों में रेखा वर्मा का कद और पद दोनों ने ऊंचाई पकड़ी है साथ ही प्रॉपर्टी भी कई गुनी हो गई है अबकी बार चार सौ पार का नारा और देश के प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी का नाम साथ में श्री राम का सहारा लेकर चुनाव मैदान में रेखा वर्मा से सबसे ज्यादा उनके कार्यकर्ता ही असंतुष्ट हैं रेखा वर्मा पर जनता से दूरी बनाने और कार्यकर्ताओं का फोन ना उठाने का आरोप लगता रहा है साथ ही विकास कार्यों में रुचि ना लेना और आक्रामक शैली भी कुछ हद तक प्रभाव डाल रही है रेखा वर्मा की राह मे इस बार बहुत से कांटे नजर आ रहे हैं पिछली बार ब्राह्मण और ठाकुर ने एक तरफा वोट बीजेपी को दिया था लेकिन इस बार एकमात्र ब्राह्मण प्रत्याशी होने के कारण ब्राह्मणों का रुझान बीएसपी की तरफ नजर आ रहा है और धौरहरा लोकसभा में ब्राह्मणों की संख्या निर्णायक होती है जो लगभग साढ़े तीन लाख के आसपास है वही आनंद भदौरिया ठाकुर समाज के वोटो में जबरदस्त पकड़ बनाए हुए हैं 2019 के आंकड़ों के अनुसार ठाकुर मतदाता लगभग सवा एक लाख है ब्राह्मण और क्षत्रिय मतदाता आमतौर पर भाजपा का वोटर माना जाता था लेकिन इस बार जबरदस्त ध्रुवीकरण से भाजपा का समीकरण बिगड़ता नजर आ रहा है वही ब्राह्मण मजबूती के साथ बसपा प्रत्याशी के साथ खड़ा नजर आ रहा है
इस बार क्या है माहौल क्या कहते हैं राजनीतिक पंडित
धौरहरा लोकसभा के राजनीतिक पंडितों का मानना है इस बार खेल होता नजर आ रहा है बसपा प्रत्याशी श्याम किशोर अवस्थी ने सबसे ज्यादा अगर किसी पार्टी का समीकरण बिगाड़ रखा रहा है तो वह है भाजपा वहीं दूसरी और आनंद भदौरिया वोट कटवा बनकर क्षत्रिय समाज के वोटो पर डाका डालते नजर आ रहे हैं मुसलमानों का रुझान भी बसपा की तरफ नजर आ रहा है क्योंकि बसपा ही बीते दो चुनाव में भाजपा को चुनौती देने में कामयाब रही है और इस बार ब्राह्मण प्रत्याशी होने के चलते बदलाव की बयार दिखाई पड़ रही है हालांकि वोटरों में मोदी और योगी के प्रति कोई शिकायत नहीं है लेकिन क्षेत्रीय सांसद के प्रति जबरदस्त आक्रोश नजर आ रहा है बीते समय में पासगंवा में चर्चित रहा चीर हरण कांड भी क्षत्रिय समाज के आक्रोश का कारण है वही मैगलगंज में किसानों पर लाठी चार्ज महिला और बुजुर्ग किसानों को दौड़ा-दौड़ा पीटने का मामला भी चर्चा का विषय है और पसगंवा क्षेत्र में रहे एक पूर्व खंड विकास अधिकारी की कार्यशैली से क्षेत्र के प्रधानों में जबरदस्त आक्रोश है वही प्रधानों का मानना है कि पूर्व में रहे खंड विकास अधिकारी पर सांसद जी का पूरा हाथ था और उनके इशारों पर ही प्रधानों का उत्पीड़न किया गया फिलहाल आने वाले समय में उलट फेर की संभावना ज्यादा है

